कक्षा 10 की ज्यामिति में त्रिभुज वह अध्याय है जहाँ पहली बार आपको आकृतियों को सिर्फ देखना नहीं, बल्कि उनके बीच का अनुपात पढ़ना सीखना पड़ता है। कक्षा 9 में आपने सर्वांगसमता (Congruence) पढ़ी थी — दो त्रिभुज बिल्कुल एक जैसे। अब बात समरूपता (Similarity) की है — आकार एक जैसा, नाप अलग। मोबाइल की फोटो को ज़ूम करने पर चेहरा वही रहता है, बस बड़ा हो जाता है; गणित में यही समरूपता है।
इस अध्याय के प्रश्न बोर्ड परीक्षा में लगभग निश्चित रूप से आते हैं — आधारभूत आनुपातिकता प्रमेय पर एक, समरूपता की कसौटी पर एक, और पाइथागोरस प्रमेय पर कम-से-कम एक। नीचे हम हर बिंदु को शुरू से, बिना कुछ छोड़े, समझेंगे।
1. समरूप आकृतियाँ और समरूप त्रिभुज
दो आकृतियाँ समरूप (Similar) कहलाती हैं यदि उनका आकार (shape) एक जैसा हो, चाहे नाप अलग हो। दो वृत्त हमेशा समरूप होते हैं, दो वर्ग हमेशा समरूप होते हैं। लेकिन दो त्रिभुज हमेशा समरूप नहीं होते — इसीलिए त्रिभुजों के लिए अलग शर्तें बनानी पड़ती हैं।
सर्वांगसमता और समरूपता का फर्क एक वाक्य में समझिए: सर्वांगसम आकृतियाँ समरूप भी होती हैं, पर समरूप आकृतियाँ सर्वांगसम हों — यह ज़रूरी नहीं। सर्वांगसमता में भुजाओं का अनुपात 1 होता है; समरूपता में यह अनुपात कोई भी स्थिर संख्या हो सकती है, जिसे अनुपात गुणक (scale factor) कहते हैं।
(i) उनके संगत कोण बराबर हों:$\angle A = \angle D, \angle B = \angle E, \angle C = \angle F$, और
(ii) उनकी संगत भुजाएँ एक ही अनुपात में हों:$\frac{AB}{DE} = \frac{BC}{EF} = \frac{CA}{FD}$.
यहाँ क्रम (order) का बहुत महत्व है। जब आप △ABC ~ △DEF लिखते हैं तो इसका अर्थ है A का जोड़ा D से, B का E से और C का F से है। अगर आप गलती से △ABC ~ △EFD लिख दें, तो सारे अनुपात बदल जाएँगे और उत्तर गलत आएगा। बोर्ड में यही एक छोटी-सी लापरवाही कई अंक ले जाती है।
- समरूपता में कोण ज्यों के त्यों रहते हैं — वे बदलते नहीं।
- भुजाएँ एक निश्चित गुणक से बढ़ती या घटती हैं।
- अनुपात गुणक 1 हो तो त्रिभुज सर्वांगसम हो जाते हैं।
- समरूपता का चिह्न ~ है, सर्वांगसमता का ≅।
एक व्यावहारिक उदाहरण: नक्शा (map)। भारत का नक्शा असली भारत के समरूप है — हर दूरी एक ही पैमाने पर छोटी की गई है, पर दिशाएँ और कोण वही हैं। यही कारण है कि नक्शे से असली दूरी निकाली जा सकती है।
2. आधारभूत आनुपातिकता प्रमेय (थेल्स प्रमेय)
यह इस पूरे अध्याय की रीढ़ है। ग्रीक गणितज्ञ थेल्स के नाम पर इसे थेल्स प्रमेय भी कहते हैं, और पाठ्यपुस्तक में इसे आधारभूत आनुपातिकता प्रमेय (Basic Proportionality Theorem, BPT) कहा गया है।
△ABC में यदि DE ∥ BC हो, जहाँ D भुजा AB पर और E भुजा AC पर है, तो —
$\frac{AD}{DB} = \frac{AE}{EC}$
इसे याद रखने का सरल तरीका: समांतर रेखा ऊपर वाले छोटे त्रिभुज को काट देती है, और ऊपर का टुकड़ा ÷ नीचे का टुकड़ा दोनों भुजाओं पर एक ही निकलता है। इसी से तीन और उपयोगी रूप बनते हैं, जो प्रश्न हल करते समय बहुत काम आते हैं:
- $\frac{AD}{DB} = \frac{AE}{EC}$(मूल रूप)
- $\frac{DB}{AD} = \frac{EC}{AE}$(उलटा करके)
- $\frac{AD}{AB} = \frac{AE}{AC}$(दोनों में 1 जोड़कर, यानी पूरी भुजा से तुलना)
- $\frac{AB}{AD} = \frac{AC}{AE}$(ऊपर वाले का उल्टा)
इनमें तीसरा रूप सबसे ज़्यादा काम आता है, क्योंकि प्रश्न में अक्सर पूरी भुजा AB दी होती है, टुकड़ा DB नहीं। बहुत से विद्यार्थी AD/DB में गलती से AB रख देते हैं — ध्यान रहे, DB का अर्थ है AB − AD।
हल — DE ∥ BC है, इसलिए BPT से $\frac{AD}{DB} = \frac{AE}{EC}$।
मान रखने पर:$\frac{3}{5} = \frac{6}{EC}$
तिरछा गुणा (cross-multiply): 3 × EC = 5 × 6 = 30
अतः $EC = 30 \div 3 =$ 10 सेमी।
जाँच: $\frac{AD}{DB} = \frac{3}{5} = 0.6$ और $\frac{AE}{EC} = \frac{6}{10} = 0.6$ — दोनों बराबर, उत्तर सही है।
हल — BPT से:$\frac{x}{x-2} = \frac{x + 2}{x-1}$
तिरछा गुणा:$x(x-1) = (x-2)(x + 2)$
बाएँ:$x^2-x$। दाएँ:$x^2-4$(क्योंकि $(a-b)(a+b) = a^2-b^2$)।
अतः $x^2-x = x^2-4$ ⇒ $-x =-4$ ⇒ $x = 4$।
जाँच: $AD = 4, DB = 2, AE = 6, EC = 3$। अब 4/2 = 2 और 6/3 = 2 — बराबर। साथ ही सभी लंबाइयाँ धनात्मक हैं, इसलिए उत्तर स्वीकार्य है।
BPT का विलोम (Converse) भी उतना ही ज़रूरी है और प्रश्नों में अक्सर पूछा जाता है: यदि कोई रेखा किसी त्रिभुज की दो भुजाओं को एक ही अनुपात में विभाजित करे, तो वह रेखा तीसरी भुजा के समांतर होती है। यानी △ABC में यदि $\frac{AD}{DB} = \frac{AE}{EC}$ हो, तो DE ∥ BC सिद्ध हो जाता है। “सिद्ध कीजिए कि DE ∥ BC” वाले प्रश्न इसी विलोम से हल होते हैं।
3. समरूपता की कसौटियाँ — AAA, SSS, SAS
परिभाषा के अनुसार समरूपता सिद्ध करने के लिए तीनों कोण और तीनों अनुपात — कुल छह बातें — जाँचनी पड़तीं। यह लंबा काम है। इसलिए गणित ने तीन छोटी कसौटियाँ दी हैं, जिनमें से कोई एक पूरी हो जाए तो समरूपता सिद्ध मान ली जाती है।
(ख) AA कसौटी — चूँकि त्रिभुज के तीनों कोणों का योग $180^\circ$ होता है, दो कोण बराबर हो जाने पर तीसरा अपने आप बराबर हो जाता है। इसलिए व्यवहार में दो कोण बराबर दिखाना ही काफ़ी है।
(ग) SSS कसौटी — यदि दो त्रिभुजों की संगत भुजाएँ एक ही अनुपात में हों, तो त्रिभुज समरूप होते हैं।
(घ) SAS कसौटी — यदि दो त्रिभुजों की दो-दो भुजाएँ एक ही अनुपात में हों और उनके बीच का कोण (included angle) बराबर हो, तो त्रिभुज समरूप होते हैं।
ध्यान दीजिए कि यहाँ SAS में “बीच का कोण” शब्द बहुत महत्वपूर्ण है। यदि बराबर कोण उन दो भुजाओं के बीच का नहीं है, तो कसौटी लागू नहीं होती। यही बात कक्षा 9 की सर्वांगसमता में भी थी।
- कोण दिए हों या समांतर रेखाएँ हों → AA सबसे तेज़ रास्ता है।
- केवल भुजाओं की लंबाइयाँ दी हों → SSS लगाइए, तीनों अनुपात अलग-अलग लिखकर बराबर दिखाइए।
- दो भुजाएँ और एक कोण दिया हो → पहले जाँचिए कि कोण उन्हीं भुजाओं के बीच है या नहीं, तभी SAS।
- समकोण त्रिभुजों में एक समकोण पहले से बराबर है, इसलिए बस एक और कोण दिखाना बाकी रहता है।
हल — समरूपता के क्रम से संगत भुजाएँ हैं: AB↔DE, BC↔EF, CA↔FD।
अनुपात गुणक $k = \frac{DE}{AB} = \frac{6}{4} = \frac{3}{2} = 1.5$
$EF = BC \times k = 6 \times 1.5 =$ 9 सेमी
$FD = CA \times k = 8 \times 1.5 =$ 12 सेमी
जाँच: 6/4 = 1.5, 9/6 = 1.5, 12/8 = 1.5 — तीनों अनुपात समान हैं।
हल — AC ∥ BD है और AB एक तिर्यक रेखा (transversal) है।
चरण 1: $\angle OAC = \angle OBD$(एकांतर कोण, alternate angles)।
चरण 2: $\angle AOC = \angle BOD$(शीर्षाभिमुख कोण, vertically opposite angles)।
चरण 3: दो कोण बराबर सिद्ध हो गए, अतः AA कसौटी से △AOC ~ △BOD। (सिद्ध)
यहाँ ध्यान दीजिए कि हमने तीसरा कोण जाँचने की ज़रूरत नहीं समझी — AA कसौटी का यही लाभ है।
4. समरूप त्रिभुजों में भुजाओं, माध्यिकाओं और क्षेत्रफल का अनुपात
जब दो त्रिभुज समरूप होते हैं तो उनकी भुजाओं का अनुपात केवल भुजाओं तक सीमित नहीं रहता। त्रिभुज की हर लंबाई उसी अनुपात में बदलती है — माध्यिका, शीर्षलंब, कोण-समद्विभाजक, परिमाप, सब कुछ। यह एक बहुत शक्तिशाली विचार है और इससे कई प्रश्न एक पंक्ति में हल हो जाते हैं।
• संगत भुजाओं का अनुपात $= k$
• संगत माध्यिकाओं का अनुपात $= k$
• संगत शीर्षलंबों (altitudes) का अनुपात $= k$
• संगत कोण-समद्विभाजकों का अनुपात $= k$
• परिमापों (perimeters) का अनुपात $= k$
• क्षेत्रफलों का अनुपात $= k^2$
क्षेत्रफल वाला नियम अलग क्यों है? क्योंकि क्षेत्रफल दो लंबाइयों के गुणनफल से बनता है — आधार × ऊँचाई $\div 2$। जब आधार k गुना हुआ और ऊँचाई भी k गुना हुई, तो क्षेत्रफल $k \times k = k^2$ गुना हो जाएगा। यही तर्क आयतन के लिए $k^3$ देता है, जो आप ऊपरी कक्षाओं में पढ़ेंगे।
हल — भुजाओं का अनुपात 3 : 4 है, अतः क्षेत्रफलों का अनुपात $3^2 : 4^2 = 9 : 16$।
मान लीजिए △DEF का क्षेत्रफल A है। तब $\frac{54}{A} = \frac{9}{16}$
तिरछा गुणा:$9A = 54 \times 16 = 864$
$A = 864 \div 9 =$ 96 वर्ग सेमी।
जाँच: 54/96 को छोटा करने पर 9/16 आता है — सही।
5. पाइथागोरस प्रमेय और उसका विलोम
यह पूरी ज्यामिति का सबसे प्रसिद्ध परिणाम है, और मज़े की बात यह है कि इसे समरूप त्रिभुजों की मदद से ही सिद्ध किया जाता है। पाइथागोरस से बनने वाले कई शब्द-प्रश्न आगे चलकर द्विघात समीकरण का रूप ले लेते हैं, इसलिए वह अध्याय साथ में दोहरा लेना उपयोगी रहता है। भारत में इसे बौधायन प्रमेय भी कहा जाता है, क्योंकि बौधायन ने इसे पाइथागोरस से सदियों पहले अपने शुल्बसूत्र में लिख दिया था।
यदि △ABC में $\angle B = 90^\circ$ हो, तो $AC^2 = AB^2 + BC^2$
विलोम — यदि किसी त्रिभुज में एक भुजा का वर्ग शेष दो भुजाओं के वर्गों के योग के बराबर हो, तो उन दो भुजाओं के बीच का कोण समकोण होता है।
कर्ण हमेशा समकोण के सामने वाली भुजा होती है और वही सबसे लंबी भुजा होती है। प्रश्न हल करते समय पहला काम यही है — पहचानिए कि कर्ण कौन-सी भुजा है। यदि आपने कर्ण गलत चुन लिया, तो सूत्र सही लगाकर भी उत्तर गलत आएगा।
- कुछ त्रिक (triplets) याद रखिए — 3, 4, 5 · 5, 12, 13 · 8, 15, 17 · 7, 24, 25 · 9, 40, 41
- इनके गुणज भी त्रिक होते हैं: 6, 8, 10 और 9, 12, 15 भी समकोण त्रिभुज बनाते हैं।
- समबाहु त्रिभुज की ऊँचाई $= (\sqrt{3} \div 2) \times$ भुजा — यह इसी प्रमेय से निकलती है।
- वर्ग का विकर्ण $= \sqrt{2} \times$ भुजा।
हल — कर्ण$^2 = 7^2 + 24^2 = 49 + 576 = 625$
कर्ण $= \sqrt{625} =$ 25 सेमी।
यह 7, 24, 25 वाला जाना-पहचाना त्रिक है — याद हो तो उत्तर बिना गणना के लिखा जा सकता है।
हल — सबसे लंबी भुजा 41 है, इसलिए यदि त्रिभुज समकोण हुआ तो यही कर्ण होगी।
छोटी भुजाओं के वर्गों का योग:$9^2 + 40^2 = 81 + 1600 = 1681$
सबसे लंबी भुजा का वर्ग:$41^2 = 1681$
दोनों बराबर हैं, अतः विलोम प्रमेय से यह समकोण त्रिभुज है, और समकोण 9 सेमी तथा 40 सेमी भुजाओं के बीच बनता है।
6. शब्द समस्याएँ — छाया, सीढ़ी और नक्शा
बोर्ड परीक्षा में इस अध्याय से जो 3 या 4 अंक वाला प्रश्न आता है, वह प्रायः शब्द समस्या ही होती है। घबराइए मत — इनका हल तीन चरणों का है: (1) आकृति बनाइए, (2) पहचानिए कि कौन-से दो त्रिभुज समरूप हैं या कहाँ समकोण है, (3) अनुपात या पाइथागोरस लगाइए।
आकृति बनाना छोड़ देना सबसे बड़ी भूल है। बिना आकृति के आप यह तय ही नहीं कर पाएँगे कि कौन-सी भुजा कर्ण है और कौन-सी भुजा किसकी संगत है।
हल — दीवार ज़मीन से लंबवत है, इसलिए दीवार, ज़मीन और सीढ़ी मिलकर समकोण त्रिभुज बनाते हैं। सीढ़ी ही कर्ण है।
ऊँचाई$^2 = 10^2-6^2 = 100-36 = 64$
ऊँचाई $= \sqrt{64} =$ 8 मीटर।
ध्यान दीजिए: यहाँ 6, 8, 10 त्रिक बना — जो 3, 4, 5 का दुगुना है।
हल — सूर्य की किरणें एक ही समय पर समांतर होती हैं, इसलिए खंभे और मीनार से बने दोनों समकोण त्रिभुजों में सूर्य का कोण बराबर है, और दोनों में एक समकोण है। AA कसौटी से दोनों त्रिभुज समरूप हैं।
अतः ऊँचाई/छाया दोनों में समान होगा:
$\frac{6}{4} = \frac{h}{28}$
$4h = 6 \times 28 = 168$
$h = 168 \div 4 =$ 42 मीटर।
जाँच: 6/4 = 1.5 और 42/28 = 1.5 — बराबर।
हल — समचतुर्भुज (rhombus) के विकर्ण एक-दूसरे को समकोण $(90^\circ )$ पर समद्विभाजित (bisect) करते हैं — यानी हर विकर्ण दूसरे को ठीक बीच में और लंबवत काटता है। इसीलिए दोनों आधे विकर्ण मिलकर एक समकोण त्रिभुज बनाते हैं, जिसका कर्ण समचतुर्भुज की भुजा है। इसलिए आधे विकर्ण होंगे $16 \div 2 = 8$ सेमी और $30 \div 2 = 15$ सेमी, और ये दोनों मिलकर एक समकोण त्रिभुज बनाते हैं जिसका कर्ण समचतुर्भुज की भुजा है।
भुजा$^2 = 8^2 + 15^2 = 64 + 225 = 289$
भुजा $= \sqrt{289} =$ 17 सेमी।
अभ्यास प्रश्नावली
नीचे दिए दस प्रश्न पहले स्वयं कॉपी में हल कीजिए, उसके बाद ही उत्तर खोलिए। सीधे उत्तर देख लेने से अभ्यास का पूरा लाभ नहीं मिलता।
प्रश्न 1. △ABC में DE ∥ BC है। $AD = 6$ सेमी,$DB = 9$ सेमी,$AE = 8$ सेमी। EC ज्ञात कीजिए।
प्रश्न 2. △ABC में DE ∥ BC है। $AD = 4$ सेमी,$AB = 12$ सेमी,$AE = 5$ सेमी। AC और EC ज्ञात कीजिए।
प्रश्न 3. △ABC ~ △PQR है,$AB = 8$ सेमी और $PQ = 12$ सेमी। यदि △ABC का परिमाप 24 सेमी हो, तो △PQR का परिमाप ज्ञात कीजिए।
प्रश्न 4. दो समरूप त्रिभुजों के क्षेत्रफलों का अनुपात 25 : 49 है। यदि पहले त्रिभुज की एक माध्यिका 10 सेमी हो, तो दूसरे की संगत माध्यिका ज्ञात कीजिए।
प्रश्न 5. एक समकोण त्रिभुज की समकोण बनाने वाली भुजाएँ 5 सेमी और 12 सेमी हैं। कर्ण ज्ञात कीजिए।
प्रश्न 6. क्या 6 सेमी, 8 सेमी और 11 सेमी भुजाओं वाला त्रिभुज समकोण त्रिभुज है?
प्रश्न 7. एक समबाहु त्रिभुज की भुजा 6 सेमी है। उसकी ऊँचाई ज्ञात कीजिए।
प्रश्न 8. दो खंभे 6 मीटर और 11 मीटर ऊँचे हैं और उनके पादों के बीच की दूरी 12 मीटर है। उनके शीर्षों के बीच की दूरी ज्ञात कीजिए।
प्रश्न 9. △ABC में DE ∥ BC है। यदि $\frac{AD}{DB} = \frac{3}{4}$ और $AC = 21$ सेमी हो, तो AE ज्ञात कीजिए।
प्रश्न 10. एक वर्ग की भुजा 7 सेमी है। उसका विकर्ण ज्ञात कीजिए।
△ABC में DE ∥ BC है। $AD = 2$ सेमी,$DB = 3$ सेमी,$AE = 4$ सेमी। EC कितना है?
दो समरूप त्रिभुजों की संगत भुजाओं का अनुपात 2 : 3 है। उनके क्षेत्रफलों का अनुपात क्या होगा?
दो त्रिभुजों के केवल दो-दो कोण बराबर हैं। किस कसौटी से वे समरूप कहलाएँगे?
एक समकोण त्रिभुज की समकोण बनाने वाली भुजाएँ 9 सेमी और 12 सेमी हैं। कर्ण कितना है?
एक समचतुर्भुज के विकर्ण 6 सेमी और 8 सेमी हैं। उसकी भुजा कितनी है?
इनमें से कौन-सा भुजा-समुच्चय समकोण त्रिभुज बनाता है?
कैज़न (Kaizen) का अर्थ है — हर दिन थोड़ा बेहतर। आज केवल BPT के दो प्रश्न सही कर लीजिए; कल पाइथागोरस के दो। यही छोटे-छोटे कदम मार्च में आपका पूरा अंक बनकर लौटेंगे।

