बहुपद वाले अध्याय में आपने x² वाले व्यंजकों के गुणनखंड करना सीखा था। द्विघात समीकरण (Quadratic Equation) उसी विचार को एक क़दम आगे ले जाता है — अब हम सिर्फ़ व्यंजक का गुणनखंड नहीं करते, बल्कि पूछते हैं: x का वह कौन-सा मान है, जिसके लिए पूरा व्यंजक शून्य के बराबर हो जाए? इस अध्याय में हम एक ही सवाल को हल करने के तीन अलग-अलग तरीक़े सीखेंगे — गुणनखंड विधि, वर्ग पूर्ण करने की विधि, और द्विघात सूत्र — और फिर देखेंगे कि बिना हल किए ही यह कैसे पता लगाया जाए कि हल असल में मौजूद भी हैं या नहीं। हर विधि छोटे-छोटे क़दमों में, हल किए हुए उदाहरणों के साथ बनाई गई है।
घर में किसी आयताकार वस्तु (जैसे दरवाज़ा या मेज़) की लंबाई और चौड़ाई नापें, यह मानते हुए कि लंबाई चौड़ाई से 3 इकाई अधिक है, एक द्विघात समीकरण बनाएं और गुणनखंड विधि से हल करें। (15-20 मिनट)
आपकी तैयारी की योजना
पहले मानक रूप पहचानना सीखिए — हर द्विघात समीकरण इसी साँचे में लिखी जा सकती है।
गुणनखंड विधि से शुरू कीजिए — यह सबसे तेज़ है, जब लागू हो।
वर्ग पूर्ण करने की विधि समझिए — यही द्विघात सूत्र की नींव है।
द्विघात सूत्र याद कीजिए — यह हर द्विघात समीकरण पर काम करता है।
विविक्तकर (Discriminant) से बिना हल किए मूलों की प्रकृति बताना सीखिए।
शब्द समस्याओं में समीकरण बनाने का अभ्यास कीजिए।
1. द्विघात समीकरण क्या होती है
जिस समीकरण में चर की सबसे बड़ी घात ठीक 2 हो, उसे द्विघात समीकरण कहते हैं। इसका मानक रूप है ax² + bx + c = 0, जहाँ a, b, c वास्तविक संख्याएँ हैं और a ≠ 0 — अगर a शून्य हो जाए तो x² वाला पद ही ग़ायब हो जाएगा और समीकरण रैखिक बनकर रह जाएगी। जैसे x² − 5x + 6 = 0 में a = 1, b = −5, c = 6।
हल का मतलब
द्विघात समीकरण का हल (मूल) वह संख्या है जिसे x की जगह रखने पर समीकरण सत्य हो जाए, यानी बायाँ पक्ष शून्य के बराबर आ जाए। चूँकि यह समीकरण दूसरी घात की है, इसके अधिकतम दो मूल हो सकते हैं — एक, दो, या (जैसा आगे देखेंगे) कोई वास्तविक मूल नहीं।
किसी संख्या को समीकरण का मूल है या नहीं, यह जाँचने का तरीक़ा बहुत सीधा है — उस संख्या को x की जगह रखकर देखिए कि बायाँ पक्ष शून्य बनता है या नहीं। जैसे x² − 5x + 6 = 0 में x = 2 रखिए: 4 − 10 + 6 = 0 ✓। तो 2 इस समीकरण का एक मूल है।
मानक रूप में लाने की आदत डालिए
कोई भी समीकरण मिलते ही सबसे पहले उसे ax² + bx + c = 0 के रूप में लाइए — सारे पद एक तरफ़, दूसरी तरफ़ शून्य। इससे a, b, c पहचानना आसान हो जाता है और आगे की हर विधि इसी पहचान पर टिकी है।
2. गुणनखंड विधि (Factorisation)
यह सबसे तेज़ विधि है, जब समीकरण आसानी से गुणनखंडों में विभक्त हो जाए। विचार यह है: अगर किन्हीं दो संख्याओं p और q का गुणनफल शून्य है, तो या तो p शून्य होगा या q शून्य होगा (या दोनों)। इसी नियम को शून्य गुणनफल नियम (Zero Product Rule) कहते हैं, और द्विघात समीकरण को हल करने में यही आधार बनता है।
गुणनखंड करने का तरीक़ा
ax² + bx + c में ऐसी दो संख्याएँ ढूँढ़िए जिनका गुणनफल a×c हो और योग b हो। फिर बीच वाले पद bx को इन दो संख्याओं में तोड़कर समूहन (grouping) से गुणनखंड कीजिए।
उदाहरण 1 — x² − 3x − 10 = 0
यहाँ a = 1, b = −3, c = −10, तो a×c = −10। ऐसी दो संख्याएँ चाहिए जिनका गुणनफल −10 हो और योग −3 हो — वे हैं −5 और 2 (क्योंकि −5 × 2 = −10 और −5 + 2 = −3)। तो: x² − 5x + 2x − 10 = 0 → x(x − 5) + 2(x − 5) = 0 → (x − 5)(x + 2) = 0। शून्य गुणनफल नियम से x − 5 = 0 या x + 2 = 0, यानी x = 5 या x = −2। जाँच: 5² − 3(5) − 10 = 25 − 15 − 10 = 0 ✓, और (−2)² − 3(−2) − 10 = 4 + 6 − 10 = 0 ✓।
उदाहरण 2 — 2x² − 5x + 3 = 0
यहाँ a = 2, b = −5, c = 3, तो a×c = 6। ऐसी दो संख्याएँ चाहिए जिनका गुणनफल 6 हो और योग −5 हो — वे हैं −2 और −3। तो: 2x² − 2x − 3x + 3 = 0 → 2x(x − 1) − 3(x − 1) = 0 → (2x − 3)(x − 1) = 0। इसलिए x = 3/2 या x = 1। जाँच: 2(3/2)² − 5(3/2) + 3 = 4.5 − 7.5 + 3 = 0 ✓।
हर समीकरण आसानी से नहीं टूटती
कई द्विघात समीकरणों के गुणनखंड पूर्णांकों में मिलते ही नहीं — जैसे x² − 4x + 1 = 0। ऐसे में गुणनखंड विधि में समय बर्बाद मत कीजिए; सीधे वर्ग पूर्ण करने की विधि या द्विघात सूत्र पर जाइए।
3. वर्ग पूर्ण करने की विधि (Completing the Square)
जब गुणनखंड आसानी से न मिलें, तो यह विधि हमेशा काम आती है। विचार यह है: x² + bx वाले भाग को एक पूर्ण वर्ग (x + k)² के रूप में लिख दिया जाए, ताकि वर्गमूल लेकर सीधे x निकाला जा सके। यही तरीक़ा आगे चलकर द्विघात सूत्र बनाने के काम भी आएगा।
वर्ग पूर्ण करने के क़दम
x² + bx को पूर्ण वर्ग बनाने के लिए दोनों तरफ़ x के गुणांक के आधे का वर्ग, यानी (b/2)², जोड़ते और घटाते हैं — इससे व्यंजक का मान नहीं बदलता, सिर्फ़ रूप बदलता है: x² + bx = (x² + bx + (b/2)²) − (b/2)² = (x + b/2)² − (b/2)²। इसे मूल समीकरण में रखकर आगे हल कीजिए।
उदाहरण 3 — x² + 4x − 5 = 0
यहाँ b = 4, तो b/2 = 2 और (b/2)² = 4। x² + 4x को (x + 2)² − 4 लिखिए: (x + 2)² − 4 − 5 = 0 → (x + 2)² = 9। दोनों तरफ़ वर्गमूल लीजिए: x + 2 = ±3। तो x + 2 = 3 से x = 1, और x + 2 = −3 से x = −5। x = 1 या x = −5। जाँच: 1² + 4(1) − 5 = 0 ✓, और (−5)² + 4(−5) − 5 = 25 − 20 − 5 = 0 ✓।
जब a, 1 न हो
अगर x² के आगे a, 1 नहीं है (जैसे 2x² + …), तो वर्ग पूर्ण करने से पहले पूरे समीकरण को a से भाग दे दीजिए ताकि x² का गुणांक 1 हो जाए। इसी क़दम को आगे बढ़ाने पर द्विघात सूत्र निकलता है — अगला भाग यही दिखाता है।
4. द्विघात सूत्र (Quadratic Formula)
वर्ग पूर्ण करने की विधि को अक्षरों a, b, c के साथ सामान्य रूप से लागू करने पर एक ऐसा सूत्र मिलता है जो हर द्विघात समीकरण पर काम करता है — चाहे गुणनखंड मिलें या न मिलें। इसे रटना ही पड़ता है, पर एक बार समझ लेने पर यह सबसे भरोसेमंद औज़ार बन जाता है।
द्विघात सूत्र
ax² + bx + c = 0 (a ≠ 0) के मूल हैं: x = [−b ± √(b² − 4ac)] / 2a राशि b² − 4ac को विविक्तकर (Discriminant) कहते हैं और आम तौर पर D से दर्शाया जाता है।
उदाहरण 4 — 6x² − 7x − 3 = 0
यहाँ a = 6, b = −7, c = −3। पहले D निकालिए: D = (−7)² − 4(6)(−3) = 49 + 72 = 121। चूँकि 121 एक पूर्ण वर्ग है, √121 = 11। अब सूत्र में रखिए: x = [7 ± 11] / 12। तो x = 18/12 = 3/2, या x = −4/12 = −1/3। जाँच: 6(3/2)² − 7(3/2) − 3 = 13.5 − 10.5 − 3 = 0 ✓।
सूत्र लगाने से पहले
हमेशा पहले समीकरण को मानक रूप ax² + bx + c = 0 में लाइए और a, b, c बड़े साफ़ तरीक़े से लिख लीजिए, चिह्न सहित। D निकालते समय −4ac में ऋणात्मक c का चिह्न बार-बार ग़लत होता है — यहीं सबसे ज़्यादा अंक कटते हैं।
5. मूलों की प्रकृति (Nature of Roots)
द्विघात सूत्र में मूल के अंदर जो राशि है — विविक्तकर D = b² − 4ac — वही तय करती है कि मूल कैसे होंगे, बिना पूरा हल निकाले। यह बोर्ड परीक्षा में बहुत बार सीधे पूछा जाता है, इसलिए इसे रटने की बजाय समझ लीजिए।
विविक्तकर का नियम
D > 0 → दो अलग-अलग वास्तविक मूल। D = 0 → दो बराबर वास्तविक मूल (मूल = −b/2a)। D < 0 → कोई वास्तविक मूल नहीं (वर्गमूल के अंदर ऋणात्मक संख्या आ जाती है)।
उदाहरण 5 — 2x² − 4x + 3 = 0 के मूलों की प्रकृति बताइए
D = (−4)² − 4(2)(3) = 16 − 24 = −8। चूँकि D ऋणात्मक है, इस समीकरण का कोई वास्तविक मूल नहीं है। ग्राफ़ की भाषा में समझें तो इसका परवलय (parabola) x-अक्ष को कहीं नहीं छूता।
उदाहरण 6 — 4x² − 4x + 1 = 0 के मूलों की प्रकृति बताइए
D = (−4)² − 4(4)(1) = 16 − 16 = 0। इसलिए दो बराबर वास्तविक मूल हैं, और उनका मान −b/2a = 4/8 = 1/2 है। जाँच: 4(1/2)² − 4(1/2) + 1 = 1 − 2 + 1 = 0 ✓।
उदाहरण 7 — k का वह मान जिसके लिए x² − kx + 9 = 0 के दोनों मूल बराबर हों
दोनों मूल बराबर होने के लिए D = 0 चाहिए: k² − 4(1)(9) = 0 → k² = 36 → k = 6 या k = −6। यहाँ पहले वाले उदाहरणों की तरह कोई दूसरी शर्त जाँचने की ज़रूरत नहीं — दोनों मान वैध हैं, क्योंकि सवाल सिर्फ़ बराबर मूल माँग रहा है, किसी ख़ास चिह्न का मूल नहीं। k = 6 पर मूल = 3, और k = −6 पर मूल = −3।
D ऋणात्मक होने का मतलब यह नहीं कि समीकरण ग़लत है
कोई वास्तविक मूल न होना कोई त्रुटि नहीं है — यह पूरी तरह मान्य उत्तर है। परीक्षा में साफ़ लिखिए “D < 0 है, इसलिए इस समीकरण का कोई वास्तविक मूल नहीं है”, बजाय हल निकालने की कोशिश में उलझने के।
6. शब्द समस्याएँ
द्विघात समीकरण की शब्द समस्याओं में सबसे बड़ी चुनौती है सही चर चुनना और कहानी को सही समीकरण में बदलना। हल हो जाने पर दोनों मूल हमेशा सही उत्तर नहीं होते — कभी-कभी एक मूल स्थिति के हिसाब से असंभव होता है (जैसे ऋणात्मक आयु या ऋणात्मक लंबाई), और उसे छाँटना पड़ता है।
उदाहरण 8 — लगातार संख्याएँ
प्रश्न: दो लगातार धनात्मक पूर्णांकों का गुणनफल 306 है। संख्याएँ ज्ञात कीजिए। माना छोटी संख्या n है, तो दूसरी n + 1 है। समीकरण: n(n + 1) = 306, यानी n² + n − 306 = 0। द्विघात सूत्र से D = 1 + 1224 = 1225, √1225 = 35। तो n = (−1 + 35)/2 = 17 (ऋणात्मक मूल n = −18 यहाँ अस्वीकार्य है, क्योंकि n धनात्मक होना चाहिए)। संख्याएँ हैं 17 और 18। जाँच: 17 × 18 = 306 ✓।
उदाहरण 9 — गति और समय
प्रश्न: एक ट्रेन 360 किमी की दूरी एक समान गति से तय करती है। यदि गति 5 किमी/घंटा और होती, तो 1 घंटा कम लगता। ट्रेन की मूल गति ज्ञात कीजिए। माना मूल गति x किमी/घंटा है। समय = 360/x घंटे। नई (5 किमी/घंटा ज़्यादा) गति पर समय = 360/(x + 5) घंटे बनता है, और शर्त यह है कि यह मूल समय से 1 घंटा कम हो, यानी: 360/x − 360/(x + 5) = 1। दोनों तरफ़ x(x + 5) से गुणा करने पर: 360(x + 5) − 360x = x(x + 5) → 1800 = x² + 5x → x² + 5x − 1800 = 0। D = 25 + 7200 = 7225, √7225 = 85। x = (−5 + 85)/2 = 40 (ऋणात्मक मूल यहाँ अस्वीकार्य है, गति ऋणात्मक नहीं हो सकती)। मूल गति 40 किमी/घंटा है। जाँच: 360/40 = 9 घंटे, और 360/45 = 8 घंटे — यानी ठीक 1 घंटा कम ✓।
उदाहरण 10 — समकोण त्रिभुज की भुजाएँ
प्रश्न: एक समकोण त्रिभुज का लंब उसके आधार से 7 सेमी कम है, और कर्ण 13 सेमी है। आधार और लंब ज्ञात कीजिए। माना आधार x सेमी है, तो लंब (x − 7) सेमी है। पाइथागोरस प्रमेय से: x² + (x − 7)² = 13² → x² + x² − 14x + 49 = 169 → 2x² − 14x − 120 = 0 → x² − 7x − 60 = 0। D = 49 + 240 = 289, √289 = 17। x = (7 + 17)/2 = 12 (ऋणात्मक मूल अस्वीकार्य)। आधार 12 सेमी, लंब 5 सेमी। जाँच: 12² + 5² = 144 + 25 = 169 = 13² ✓।
दोनों मूल निकालने के बाद रुकिए मत
द्विघात समीकरण हल करने पर अक्सर दो मूल मिलते हैं, पर कहानी की शर्त — धनात्मक आयु, धनात्मक लंबाई, धनात्मक गति — अक्सर एक मूल को ख़ारिज कर देती है। दोनों मूल निकालने के बाद हमेशा यह पूछिए: “क्या यह मूल कहानी में संभव है?”
अभ्यास प्रश्नावली
हर प्रश्न पहले कॉपी पर पूरा हल कीजिए, उसके बाद ही उत्तर देखें पर टैप कीजिए।
प्र1. गुणनखंड विधि से हल कीजिए: x² − 7x + 12 = 0।
उत्तर देखें
a×c = 12, ऐसी दो संख्याएँ जिनका योग −7 और गुणनफल 12 हो — वे हैं −3 और −4। (x − 3)(x − 4) = 0। हल: x = 3 या x = 4।
a×c = −12, ऐसी दो संख्याएँ जिनका योग 1 और गुणनफल −12 हो — वे हैं 4 और −3। 6x² + 4x − 3x − 2 = 0 → 2x(3x + 2) − 1(3x + 2) = 0 → (2x − 1)(3x + 2) = 0। हल: x = 1/2 या x = −2/3।
⚡ त्वरित प्रश्नोत्तरी — खुद को परखिए
किसी विकल्प पर टैप करते ही उत्तर तुरंत पता चलेगा। छह प्रश्न — नोट्स देखे बिना!
1. x² − 5x + 6 = 0 के मूल क्या हैं?
गुणनखंड: (x−2)(x−3)=0, इसलिए x = 2 या 3।
2. ax² + bx + c = 0 में a का मान क्या नहीं हो सकता?
अगर a = 0 हो तो x² वाला पद ग़ायब हो जाएगा और समीकरण रैखिक बन जाएगी, द्विघात नहीं रहेगी।
3. 2x² − 4x + 3 = 0 के मूलों की प्रकृति क्या है?
D = 16 − 24 = −8, जो ऋणात्मक है, इसलिए कोई वास्तविक मूल नहीं।
4. 4x² − 4x + 1 = 0 का विविक्तकर D क्या है?
D = 16 − 16 = 0, इसलिए दोनों मूल बराबर हैं (x = 1/2)।
5. द्विघात सूत्र में मूल के अंदर कौन-सी राशि आती है?
विविक्तकर D = b² − 4ac है, यही मूलों की प्रकृति तय करता है।
6. दो लगातार धनात्मक पूर्णांकों का गुणनफल 306 है। बड़ी संख्या कौन-सी है?
n(n+1)=306 से n²+n−306=0, D=1225, √D=35, n=17। बड़ी संख्या 18।
अगर प्रश्नोत्तरी में चार से कम सही हुए, तो द्विघात सूत्र और मूलों की प्रकृति वाले भाग एक बार और पढ़िए, फिर प्रश्नावली दोबारा हल कीजिए।
द्विघात समीकरण पर पकड़ बन गई हो तो रैखिक समीकरण युग्म और बहुपद को दोहराइए — तीनों अध्याय बीजगणित की नींव बनाते हैं। पूरे विषय के अध्याय हिंदी माध्यम अनुभाग में मिलेंगे।
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