कक्षा 10 की गणित शुरू करने के लिए वास्तविक संख्याएँ (Real Numbers) सबसे अच्छा अध्याय है — यह छोटा है, तर्क पर चलता है, और इसके सिर्फ़ दो बड़े विचार समझ लेने पर पूरे अंक आपके हैं। अगर अभाज्य संख्याएँ या उपपत्ति (proof) सुनकर घबराहट होती है, तो बिल्कुल चिंता मत कीजिए। हम हर चीज़ एकदम शुरू से, छोटे-छोटे क़दमों में बनाएँगे — जैसे कोई शिक्षक आपके पास बैठकर समझा रहा हो। अपनी गति से चलिए, और जब तक एक भाग आराम से समझ न आ जाए, अगले पर मत जाइए।
इस अध्याय में आप क्या सीखेंगे — किसी भी भाग पर सीधे जाने के लिए उस पर टैप कीजिए
घर में रखी किन्हीं पाँच वस्तुओं की गिनती करें और उनकी संख्याओं को अभाज्य गुणनखंडों (prime factors) के रूप में लिखें। (15-20 मिनट)
आपकी तैयारी की योजना
वार्म-अप से समझिए कि वास्तविक संख्याएँ असल में हैं क्या।
अंकगणित की आधारभूत प्रमेय सीखिए — यही इस अध्याय का दिल है।
उसी से HCF और LCM जल्दी और भरोसे से निकालना सीखिए।
बोर्ड में लगभग हर साल पूछी जाने वाली अपरिमेयता की उपपत्ति पर पकड़ बनाइए।
अंत की प्रश्नावली से सीख पक्की कीजिए।
1. वास्तविक संख्याएँ क्या होती हैं — एक तेज़ शुरुआत
आपने अब तक जितनी भी संख्याएँ इस्तेमाल की हैं, वे दो परिवारों में बँटती हैं। परिमेय संख्याएँ (Rational) वे हैं जिन्हें $\frac{p}{q}$ के रूप में लिखा जा सकता है (जहाँ p और q पूर्णांक हैं और q शून्य नहीं है) — जैसे 5, $-3$, $\frac{1}{2}$, 0.75। अपरिमेय संख्याएँ (Irrational) वे हैं जिन्हें ऐसे किसी भिन्न के रूप में नहीं लिखा जा सकता — उनका दशमलव प्रसार न तो कभी समाप्त होता है और न ही उसमें अंकों की पुनरावृत्ति होती है, जैसे $\sqrt{2} = 1.41421356\ldots$ या $\pi$। इन दोनों परिवारों को मिला दीजिए, तो वास्तविक संख्याएँ मिलती हैं — यानी हर वह संख्या जिसे संख्या रेखा पर एक बिंदु के रूप में दिखाया जा सकता है।
मुख्य विचार
वास्तविक संख्याएँ = परिमेय + अपरिमेय। जो भी संख्या रेखा पर कहीं बैठ सकती है, वह वास्तविक संख्या है। यह अध्याय असल में इन्हीं दो परिवारों को गहराई से जानने की कहानी है।
किसी भी संख्या को अभाज्य संख्याओं (पीले नोट) तक तोड़ते जाइए — तरीका हमेशा एक ही निकलेगा।
यही पूरे अध्याय का सबसे बड़ा विचार है: हर भाज्य संख्या (composite number) को अभाज्य संख्याओं (primes) के गुणनफल के रूप में लिखा जा सकता है — और क्रम को छोड़ दें तो ऐसा करने का तरीका केवल एक ही होता है। अभाज्य संख्याओं को गणित की LEGO ईंटें समझिए: हर संख्या इन्हीं ईंटों से, एक तय तरीक़े से बनी है। ऊपर के चित्र में देखिए — 60 को तोड़ते-तोड़ते अंत में $2 \times 2 \times 3 \times 5$ ही मिलता है, चाहे आप किसी भी रास्ते से तोड़ें।
उदाहरण 1 — 3825 का अभाज्य गुणनखंड
3825 को सबसे छोटे अभाज्य से भाग देना शुरू कीजिए। $3825 \div 3 = 1275$, फिर $1275 \div 3 = 425$। अब 3 से भाग नहीं जाता, तो 5 आज़माइए: $425 \div 5 = 85$, फिर $85 \div 5 = 17$ — और 17 स्वयं अभाज्य है। इसलिए $3825 = 3^2 \times 5^2 \times 17$।
उदाहरण 2 — क्या $6^n$ कभी 0 पर समाप्त हो सकता है?
कोई संख्या 0 पर तभी समाप्त होती है जब वह 10 से विभाज्य हो, यानी उसके गुणनखंड में 2 और 5 दोनों हों। पर $6^n = (2 \times 3)^n = 2^n \times 3^n$ — इसमें 5 कहीं है ही नहीं। आधारभूत प्रमेय के अनुसार गुणनखंड अनोखा होता है, इसलिए 5 अचानक प्रकट नहीं हो सकता। अतः $6^n$ किसी भी प्राकृत संख्या n के लिए 0 पर समाप्त नहीं होगा।
परीक्षा टिप
गुणनखंड हमेशा सबसे छोटे अभाज्य (2, फिर 3, फिर 5…) से शुरू कीजिए और उत्तर को घातांक के रूप में लिखिए (जैसे $2^2 \times 3 \times 5$)। परीक्षक यही स्वरूप देखना चाहते हैं।
एक बार अभाज्य गुणनखंड मिल जाएँ, तो HCF और LCM लगभग अपने-आप निकल आते हैं। बस ये दो नियम याद रखिए:
मुख्य नियम
HCF = हर साझे अभाज्य की सबसे छोटी घात का गुणनफल। LCM = हर उपस्थित अभाज्य की सबसे बड़ी घात का गुणनफल। और दो संख्याओं के लिए: $\text{HCF} \times \text{LCM} =$ दोनों संख्याओं का गुणनफल।
उदाहरण 3 — 96 और 404 के HCF व LCM
$96 = 2^5 \times 3$ और $404 = 2^2 \times 101$। उभयनिष्ठ अभाज्य केवल 2 है, जिसकी छोटी घात $2^2$ है, इसलिए HCF = 4। LCM के लिए हर अभाज्य की बड़ी घात लीजिए: $2^5 \times 3 \times 101$ = 9696। जाँच: $4 \times 9696 = 38784 = 96 \times 404$ ✓
उदाहरण 4 — अज्ञात संख्या निकालना
दो संख्याओं का HCF 9 और LCM 90 है। एक संख्या 18 है, दूसरी क्या है? नियम से: दूसरी संख्या = $(\text{HCF} \times \text{LCM}) \div$ पहली = $(9 \times 90) \div 18 = 810 \div 18$ = 45।
सामान्य ग़लती
$\text{HCF} \times \text{LCM} =$ गुणनफल वाला नियम केवल दो संख्याओं के लिए है। तीन संख्याओं पर यह सीधे लागू नहीं होता — वहाँ हमेशा गुणनखंड विधि ही अपनाइए।
बोर्ड परीक्षा में लगभग हर साल आने वाली एक ही उपपत्ति है — विरोधाभास की विधि (proof by contradiction)। तरीक़ा हमेशा एक जैसा है: मान लीजिए कि संख्या परिमेय है, फिर दिखाइए कि इस मान्यता से कोई असंभव बात निकल आती है।
उदाहरण 5 — सिद्ध कीजिए कि $\sqrt{2}$ अपरिमेय है
मान लीजिए $\sqrt{2}$ परिमेय है, यानी $\sqrt{2} = \frac{a}{b}$, जहाँ a और b सह-अभाज्य (co-prime) हैं, यानी उनमें 1 के अलावा कोई उभयनिष्ठ गुणनखंड नहीं है। दोनों पक्षों का वर्ग करने पर $2 = \frac{a^2}{b^2}$, यानी $a^2 = 2b^2$। इसका मतलब $a^2$ सम है, इसलिए a भी सम होगा — लिखिए $a = 2c$। तब $4c^2 = 2b^2$, यानी $b^2 = 2c^2$ — तो b भी सम निकला! पर a और b दोनों सम नहीं हो सकते, क्योंकि हमने माना था कि उनमें कोई उभयनिष्ठ गुणनखंड नहीं। यही विरोधाभास है। अतः हमारी मान्यता ग़लत थी — $\sqrt{2}$ अपरिमेय है।
उदाहरण 6 — सिद्ध कीजिए कि $5 + \sqrt{2}$ अपरिमेय है
मान लीजिए $5 + \sqrt{2}$ परिमेय है, मान लीजिए वह r है। तब $\sqrt{2} = r-5$ — और दो परिमेय संख्याओं का अंतर परिमेय होता है, यानी $\sqrt{2}$ परिमेय निकला। पर हम सिद्ध कर चुके हैं कि $\sqrt{2}$ अपरिमेय है — विरोधाभास! अतः $5 + \sqrt{2}$ अपरिमेय है।
अंक दिलाने वाली बात
उपपत्ति की शुरुआत हमेशा “मान लीजिए कि… परिमेय है” से कीजिए और अंत में “यह विरोधाभास है, अतः…” ज़रूर लिखिए। यही दो वाक्य पूरे अंक पक्के करते हैं।
प्र5. क्या $6^n$ किसी प्राकृत संख्या n के लिए अंक 0 पर समाप्त हो सकता है? कारण दीजिए।
उत्तर देखें
नहीं। 0 पर समाप्त होने के लिए संख्या में 2 और 5 दोनों गुणनखंड चाहिए, पर $6^n = 2^n \times 3^n$ में 5 है ही नहीं। आधारभूत प्रमेय के अनुसार गुणनखंड अनोखा है, अतः $6^n$ कभी 0 पर समाप्त नहीं होगा।
प्र6. दो घंटियाँ 9 और 12 मिनट के अंतराल पर बजती हैं। यदि दोनों सुबह 6:00 बजे साथ बजीं, तो अगली बार साथ कब बजेंगी?
उत्तर देखें
LCM(9, 12) = 36 मिनट। अतः दोनों घंटियाँ अगली बार सुबह 6:36 बजे साथ बजेंगी।
प्र7. सिद्ध कीजिए कि $\sqrt{5}$ अपरिमेय है।
उत्तर देखें
मान लीजिए $\sqrt{5} = \frac{a}{b}$ (a, b में कोई उभयनिष्ठ गुणनखंड नहीं)। वर्ग करने पर $a^2 = 5b^2$, यानी $a^2$ पर 5 का भाग जाता है, अतः a पर भी। $a = 5c$ रखने पर $b^2 = 5c^2$ — तो b पर भी 5 का भाग! यह मान्यता के विरुद्ध है। अतः $\sqrt{5}$ अपरिमेय है।
प्र8. सिद्ध कीजिए कि $2 + \sqrt{3}$ अपरिमेय है।
उत्तर देखें
मान लीजिए $2 + \sqrt{3} = r$ (परिमेय)। तब $\sqrt{3} = r-2$, जो दो परिमेय संख्याओं का अंतर होने से परिमेय होगा — पर $\sqrt{3}$ अपरिमेय है। विरोधाभास! अतः $2 + \sqrt{3}$ अपरिमेय है।
⚡ त्वरित प्रश्नोत्तरी — खुद को परखिए
किसी विकल्प पर टैप करते ही उत्तर तुरंत पता चलेगा। छह प्रश्न — नोट्स देखे बिना!
1. 96 और 404 का HCF क्या है?
$96 = 2^5 \times 3$ और $404 = 2^2 \times 101$। उभयनिष्ठ अभाज्य केवल 2 है और उसकी छोटी घात $2^2 = 4$।
2. 6, 72 और 120 का LCM क्या है?
$6 = 2\times3$, $72 = 2^3\times3^2$, $120 = 2^3\times3\times5$। हर अभाज्य की बड़ी घात: $2^3 \times 3^2 \times 5 = 360$।
3. इनमें से अपरिमेय संख्या कौन-सी है?
0.75, $\frac{22}{7}$ और 3.14 सबको भिन्न के रूप में लिखा जा सकता है। $\sqrt{2} = 1.41421356\ldots$ न समाप्त होता है, न दोहराता है — इसलिए अपरिमेय।
4. दो संख्याओं का HCF 9 और LCM 90 है। एक संख्या 18 है, तो दूसरी होगी:
दूसरी संख्या = $(\text{HCF} \times \text{LCM}) \div$ पहली = $(9 \times 90) \div 18 = 45$।
5. अंकगणित की आधारभूत प्रमेय के अनुसार, भाज्य संख्या का अभाज्य गुणनखंड होता है:
हर भाज्य संख्या अभाज्यों के गुणनफल के रूप में केवल एक ही तरीक़े से लिखी जा सकती है (गुणनखंडों का क्रम छोड़कर)।
6. 3825 का अभाज्य गुणनखंड रूप है:
$3825 \div 25 = 153$ और $153 = 9 \times 17 = 3^2 \times 17$। अतः $3825 = 3^2 \times 5^2 \times 17$। (153 और 425 अभाज्य नहीं हैं, इसलिए वे विकल्प अधूरे गुणनखंड हैं।)
बस इतना ही! अगर ये प्रश्न आराम से हल हो रहे हैं, तो वास्तविक संख्याएँ सचमुच आपकी पकड़ में हैं। पहली बार में पूर्णता का लक्ष्य मत रखिए — कल से बस एक प्रश्न ज़्यादा सही करने का लक्ष्य रखिए। आगे बढ़ने से पहले बहुपद (Polynomials) अध्याय भी देखिए।
Continue Learning
More chapters from this subject — keep the momentum going.