सोचिए — आप एक थिएटर में बैठे हैं। पहली पंक्ति में 20 सीटें हैं, और हर अगली पंक्ति में 2 सीटें ज़्यादा। बिना एक-एक गिने बता सकते हैं कि 30वीं पंक्ति में कितनी सीटें होंगी? या पूरे हॉल में कुल कितनी? यही समांतर श्रेणी (Arithmetic Progression) का काम है — संख्याओं का ऐसा क्रम जहाँ हर अगला पद पिछले में एक तय संख्या जोड़ने से बनता है। यह कक्षा 10 गणित के सबसे स्कोरिंग अध्यायों में से एक है, क्योंकि इसमें सिर्फ़ दो सूत्र हैं और बाक़ी सब पहचान का खेल है। हम दोनों सूत्र ख़ुद बनाएँगे, रटेंगे नहीं — जो चीज़ बनाकर समझी जाती है, वह परीक्षा हॉल में भूलती नहीं।
आपकी तैयारी की योजना
- पहले AP की पहचान पक्की कीजिए — कौन-सी सूची AP है और कौन-सी नहीं।
- फिर $a_n$ का सूत्र बनाइए, रटिए मत। बनाने पर (n−1) कभी नहीं भूलेंगे।
- योग का सूत्र दोनों रूपों में साधिए — कब कौन-सा तेज़ पड़ता है, यह पहचानिए।
- शब्द-प्रश्नों का ख़ूब अभ्यास कीजिए। बोर्ड में सबसे ज़्यादा अंक और सबसे ज़्यादा भ्रम यहीं है।
- अंत में अभ्यास प्रश्नावली बिना नोट्स देखे हल कीजिए।
1. समांतर श्रेणी क्या होती है
किसी सूची में अगर लगातार दो पदों का अंतर हर बार एक ही रहे, तो वह सूची समांतर श्रेणी कहलाती है। जैसे 5, 8, 11, 14, 17 — यहाँ हर बार 3 जुड़ रहा है। इस स्थिर अंतर को सार्व अंतर (common difference) कहते हैं और $d$ से लिखते हैं। सबसे पहला पद $a$ कहलाता है, और जितने पद तक जाना है वह संख्या $n$ है। बस इन तीन अक्षरों — $a$, $d$, $n$ — पर पूरा अध्याय टिका है।
$d$ निकालना सबसे आसान काम है: किसी भी पद में से उसका ठीक पिछला पद घटा दीजिए, यानी $d = a_2 – a_1 = a_3 – a_2$ और इसी तरह आगे। ध्यान यह रखना है कि अंतर पूरी सूची में एक-सा आए। एक जगह भी बदल गया तो वह AP नहीं है — और परीक्षा में यही जाँच पहला अंक दिलाती है।
अंतर देखिए: $7-10 = -3$, $4-7 = -3$, $1-4 = -3$, $-2-1 = -3$।
हर जगह वही अंतर मिला, इसलिए यह AP है — जिसमें $a = 10$ और $d = -3$। यहाँ $d$ ऋणात्मक है, यानी संख्याएँ घटती जा रही हैं। यह बिल्कुल मान्य है।
$d$ धनात्मक भी हो सकता है, ऋणात्मक भी, और शून्य भी। $d = 0$ होने पर सारे पद बराबर रहेंगे (जैसे 5, 5, 5, 5) — यह भी नियम से एक AP ही है, बस बहुत उबाऊ वाली।
2. n-वाँ पद ज्ञात करना
अब सोचिए कि 100वाँ पद चाहिए तो क्या 99 बार जोड़ते बैठेंगे? नहीं। थोड़ा-सा ध्यान दीजिए कि पद बनते कैसे हैं — पहला पद $a$ है (इसमें $d$ एक बार भी नहीं जुड़ा), दूसरा पद $a + d$ है, तीसरा $a + 2d$, चौथा $a + 3d$। हर बार $d$ का गुणक पद-संख्या से ठीक एक कम है। बस यही पूरा सूत्र है।
चरण 1 — तीनों अक्षर लिखिए: $a = 7$, $d = 13-7 = 6$, $n = 25$।
चरण 2 — सूत्र में रखिए: $a_{25} = 7 + (25-1)\times 6$।
चरण 3 — हल: $= 7 + 24 \times 6 = 7 + 144 = 151$।
उत्तर: 25वाँ पद 151 है।
इसी सूत्र को उल्टा चलाकर यह भी पूछा जाता है कि कोई दी हुई संख्या उस AP में आती है या नहीं। तरीक़ा वही रहता है — बस अब $n$ अज्ञात होता है और उसे निकालना पड़ता है।
चरण 1: $a = 5$, $d = 6$। मान लीजिए $a_n = 301$।
चरण 2: $301 = 5 + (n-1)\times 6$, इसलिए $296 = (n-1)\times 6$।
चरण 3: $n-1 = \frac{296}{6} = 49\frac{1}{3}$, यानी $n = 50\frac{1}{3}$।
निष्कर्ष: $n$ पूर्णांक नहीं आया, इसलिए 301 इस AP का पद नहीं है। पद-संख्या हमेशा 1, 2, 3… ही हो सकती है — यह जाँच कभी मत छोड़िए।
चरण 1 — दोनों को सूत्र में लिखिए: $a + 6d = 34$ और $a + 12d = 64$।
चरण 2 — घटाइए: दोनों घटाने पर $a$ कट जाता है और बचता है $6d = 30$, इसलिए $d = 5$।
चरण 3 — $a$ निकालिए: $a + 6(5) = 34$, यानी $a = 34 – 30 = 4$।
चरण 4: $a_{20} = 4 + 19 \times 5 = 4 + 95 = 99$।
उत्तर: 20वाँ पद 99 है। दो पद दिए हों तो हमेशा यही दो-समीकरण वाला रास्ता लीजिए।
3. n पदों का योग
अब दूसरा बड़ा सवाल — पहले $n$ पदों को बिना एक-एक जोड़े कैसे जोड़ें? इसकी तरकीब बहुत सुंदर है, और इसे एक बार समझ लेने पर सूत्र याद रखना ही नहीं पड़ता। योग को एक बार सीधा लिखिए और उसके ठीक नीचे उल्टा लिखिए, फिर दोनों को जोड़ दीजिए।
ऊपर की पंक्ति है $a,\; a+d,\; a+2d,\; \ldots,\; a+(n-1)d$ और नीचे की पंक्ति वही उल्टी। अब हर खड़ी जोड़ी का योग निकालिए — पहली जोड़ी है $a + [a+(n-1)d] = 2a+(n-1)d$, और मज़े की बात यह है कि हर जोड़ी का योग बिल्कुल यही निकलता है, क्योंकि जितना ऊपर वाला बढ़ता है उतना ही नीचे वाला घटता है। ऐसी $n$ जोड़ियाँ हैं, इसलिए दोनों पंक्तियों का कुल योग $n[2a+(n-1)d]$ हुआ। पर हमने योग दो बार गिना है, इसलिए 2 से भाग दे दीजिए।
चरण 1: $a = 3$, $d = 4$, $n = 20$।
चरण 2: $S_{20} = \frac{20}{2}\left[2(3)+(20-1)(4)\right]$।
चरण 3: $= 10 \times [6 + 76] = 10 \times 82 = 820$।
उत्तर: योग 820 है।
चरण 1: $a = 9$, $d = 8$, $S_n = 636$।
चरण 2: $\frac{n}{2}\left[18+(n-1)8\right] = 636$, यानी $n\left[18+8n-8\right] = 1272$।
चरण 3: $8n^2+10n-1272 = 0$, दोनों तरफ़ 2 से भाग देने पर $4n^2+5n-636 = 0$।
चरण 4: गुणनखंड कीजिए — $(n-12)(4n+53) = 0$। इसलिए $n = 12$ या $n = -\frac{53}{4}$।
चरण 5: पदों की संख्या ऋणात्मक या भिन्न नहीं हो सकती, इसलिए $n = 12$।
जाँच: $S_{12} = 6\left[18+88\right] = 6 \times 106 = 636$ — सही।
चरण 1 — पहली और अंतिम ढूँढिए: तीन अंकों की सबसे छोटी संख्या 100 है; 7 से विभाज्य पहली संख्या 105 है। सबसे बड़ी 999 है; उससे नीचे 7 से विभाज्य 994 है।
चरण 2 — कितने पद: $994 = 105+(n-1)7$, इसलिए $889 = (n-1)7$, यानी $n-1 = 127$ और $n = 128$।
चरण 3 — योग: यहाँ अंतिम पद मालूम है, इसलिए दूसरा सूत्र तेज़ है — $S_{128} = \frac{128}{2}(105+994) = 64 \times 1099 = 70336$।
उत्तर: योग 70336 है।
4. शब्द-प्रश्न और रोज़मर्रा के उदाहरण
AP सिर्फ़ किताबी सूची नहीं है। सीढ़ी के डंडे बराबर दूरी पर लगते हैं, हर महीने की बचत बराबर राशि से बढ़ती है, स्टेडियम की हर अगली पंक्ति में तय संख्या में सीटें बढ़ती हैं, और टैक्सी का मीटर हर किलोमीटर पर उतना ही जोड़ता है। जहाँ भी “हर बार उतना ही बदलाव” दिखे — वहाँ AP बैठ जाती है।
शब्द-प्रश्नों में असली काम गणना नहीं, अनुवाद है। जब तक आप यह तय नहीं कर लेते कि इस कहानी में $a$ क्या है, $d$ क्या है और पूछा क्या जा रहा है — $n$-वाँ पद या योग — तब तक सूत्र छूना ही मत।
चरण 1 — अनुवाद: $a = 20$ (पहली पंक्ति), $d = 2$ (हर पंक्ति की बढ़त), $n = 30$ (पंक्तियाँ)। “कुल सीटें” पूछी हैं, इसलिए योग चाहिए।
चरण 2 — अंतिम पंक्ति: $a_{30} = 20+29 \times 2 = 78$ सीटें।
चरण 3 — योग: $S_{30} = \frac{30}{2}(20+78) = 15 \times 98 = 1470$।
उत्तर: हॉल में 1470 सीटें हैं।
चरण 1 — अनुवाद: पहले किराए की सूची बनाइए — 1 किमी तक ₹20, 2 किमी तक ₹28, 3 किमी तक ₹36, और इसी तरह आगे। यह सूची 20, 28, 36, … ख़ुद एक समांतर श्रेणी है जिसमें $a = 20$ और $d = 8$। ध्यान दीजिए कि इस सूची का हर पद “उस किलोमीटर तक का कुल किराया” बताता है, सिर्फ़ उस एक किलोमीटर का नहीं।
चरण 2: इसलिए 12 किमी का किराया इसी श्रेणी का 12वाँ पद है — हमें $a_{12}$ चाहिए, योग नहीं।
चरण 3: $a_{12} = 20+(12-1)\times 8 = 20+88 = 108$।
उत्तर: कुल किराया ₹108।
इसी तरह की सोच द्विघात समीकरण के शब्द-प्रश्नों में भी काम आती है — पहले स्थिति को समीकरण में बदलिए, फिर हल कीजिए।
अभ्यास प्रश्नावली
हर प्रश्न पहले कॉपी पर पूरा हल कीजिए — $a$, $d$, $n$ अलग लिखकर — उसके बाद ही “उत्तर देखें” पर टैप कीजिए। सिर्फ़ उत्तर मिला लेना पढ़ाई नहीं है।
प्र1. AP 3, 8, 13, 18, … का 20वाँ पद ज्ञात कीजिए।
उत्तर देखें
प्र2. AP 21, 18, 15, … का पहला ऋणात्मक पद कौन-सा है?
उत्तर देखें
प्र3. 1 से 100 तक की सभी प्राकृत संख्याओं का योग ज्ञात कीजिए।
उत्तर देखें
प्र4. 8 के पहले 15 गुणजों का योग ज्ञात कीजिए।
उत्तर देखें
प्र5. किसी AP का तीसरा पद 16 है और 7वाँ पद 5वें पद से 12 अधिक है। AP ज्ञात कीजिए।
उत्तर देखें
प्र6. AP 17, 14, 11, … के पहले 20 पदों का योग ज्ञात कीजिए।
उत्तर देखें
प्र7. तीन संख्याएँ AP में हैं। उनका योग 27 और गुणनफल 648 है। संख्याएँ ज्ञात कीजिए।
उत्तर देखें
योग: $(a-d)+a+(a+d) = 3a = 27$, इसलिए $a = 9$।
गुणनफल: $(9-d)(9)(9+d) = 648$, यानी $9(81-d^2) = 648$, इसलिए $81-d^2 = 72$ और $d^2 = 9$, यानी $d = \pm 3$।
संख्याएँ हैं 6, 9, 12 (या उल्टे क्रम में 12, 9, 6)। जाँच: $6+9+12 = 27$ और $6 \times 9 \times 12 = 648$।
प्र8. एक विद्यार्थी पहले महीने ₹100 बचाता है और हर अगले महीने ₹50 अधिक। एक वर्ष में कुल कितनी बचत होगी?
उत्तर देखें
1. AP 2, 5, 8, 11, … का 15वाँ पद क्या है?
2. AP 5, 8, 11, … के पहले 15 पदों का योग क्या है?
3. किसी AP में $a = 10$ और $d = -7$ है। तीसरा पद क्या होगा?
4. निम्न में से कौन-सी सूची AP है?
5. किसी AP का पहला पद 5 और अंतिम पद 45 है, और कुल 9 पद हैं। योग क्या होगा?
6. AP 7, 10, 13, … में 43 कौन-सा पद है?
बस इतना ही! अगर ये छह प्रश्न बिना अटके निकल गए, तो समांतर श्रेणी आपकी पकड़ में है। पहली बार में पूर्णता का लक्ष्य मत रखिए — कल से बस एक प्रश्न ज़्यादा सही करने का लक्ष्य रखिए। आगे बढ़ने से पहले बहुपद और वास्तविक संख्याएँ पर भी एक नज़र डाल लीजिए — इन तीनों की नींव आपस में जुड़ी हुई है।
रोज़ थोड़ा-थोड़ा, पर रोज़ — यही काइज़ेन है। एक दिन में पूरा अध्याय नहीं, हर दिन एक भाग।
