त्रिकोणमिति (Trigonometry) का नाम सुनते ही बहुत से विद्यार्थियों को लगता है कि अब कुछ बहुत कठिन आने वाला है। सच इसके ठीक उलट है। यह पूरा अध्याय असल में एक ही साधारण-सी बात पर टिका हुआ है — किसी समकोण त्रिभुज में अगर एक न्यून कोण तय हो जाए, तो उसकी भुजाओं का आपस का अनुपात हमेशा वही रहता है, चाहे त्रिभुज छोटा बनाइए या बड़ा। बस इसी एक विचार से छह अनुपात, कुछ याद रखने लायक मान और दो-तीन सर्वसमिकाएँ निकल आती हैं। हम इन्हें एक-एक करके, बिल्कुल शुरू से बनाएँगे — जल्दबाज़ी बिल्कुल नहीं। जब तक एक भाग आराम से समझ न आ जाए, अगले पर मत जाइए।
आपकी तैयारी की योजना
- वार्म-अप में समकोण त्रिभुज की तीनों भुजाओं के नाम पक्के कीजिए — यही पूरी नींव है।
- छह अनुपात की परिभाषाएँ रटिए मत, बनाना सीखिए।
- विशेष कोणों की सारणी को एक तरकीब से याद रखिए।
- सर्वसमिकाएँ सिद्ध करना सीखिए — बोर्ड में यहीं से सबसे ज़्यादा प्रश्न आते हैं।
- अंत में अभ्यास प्रश्नावली बिना नोट्स देखे हल कीजिए।
1. समकोण त्रिभुज और भुजाओं के नाम
त्रिकोणमिति की पूरी इमारत एक ही आकृति पर खड़ी है — समकोण त्रिभुज, यानी वह त्रिभुज जिसका एक कोण ठीक $90^\circ$ का हो। मान लीजिए त्रिभुज ABC में कोण B समकोण है। बाक़ी दोनों कोण — A और C — न्यून कोण होंगे, क्योंकि त्रिभुज के तीनों कोणों का योग $180^\circ$ होता है और $90^\circ$ तो पहले ही खर्च हो चुका।
अब सबसे ज़रूरी बात। हम इस त्रिभुज की भुजाओं को नाम देते हैं, पर ये नाम किसी एक चुने हुए न्यून कोण के सापेक्ष दिए जाते हैं। मान लीजिए हमने कोण A चुना। तब —
- कर्ण (Hypotenuse) — समकोण के सामने वाली भुजा, यानी AC। यह हमेशा सबसे लंबी होती है और कोण बदलने पर भी नहीं बदलती।
- सम्मुख भुजा (Opposite side) — कोण A के ठीक सामने पड़ी भुजा, यानी BC।
- संलग्न भुजा (Adjacent side) — कोण A को छूने वाली वह भुजा जो कर्ण नहीं है, यानी AB।
एक बात और, जो अक्सर उलझन पैदा करती है। बहुत-सी हिंदी पाठ्यपुस्तकों में और बहुत-से शिक्षकों की भाषा में इन्हीं तीन भुजाओं के छोटे नाम चलते हैं — सम्मुख भुजा को लंब, संलग्न भुजा को आधार और कर्ण को कर्ण ही कहा जाता है। नाम अलग हैं, चीज़ बिल्कुल वही है। इसलिए कहीं “लंब बटा कर्ण” लिखा दिखे तो अटकिए मत — वह सम्मुख/कर्ण ही है।
एक ठोस उदाहरण से यह पक्का कर लीजिए। मान लीजिए समकोण त्रिभुज की भुजाएँ 3 सेमी, 4 सेमी और 5 सेमी हैं, समकोण B पर है,$AB = 4, BC = 3$ और कर्ण $AC = 5$(जाँचिए:$3^2 + 4^2 = 9 + 16 = 25 = 5^2$, पाइथागोरस प्रमेय सही बैठती है)। कोण A के लिए सम्मुख = 3, संलग्न = 4, कर्ण = 5। कोण C के लिए सम्मुख = 4, संलग्न = 3, कर्ण वही 5।
2. छह त्रिकोणमितीय अनुपात
अब असली विचार। कल्पना कीजिए कि आपने कोण A का माप तय कर दिया — मान लीजिए $30^\circ$। अब आप जितने चाहें उतने अलग-अलग आकार के समकोण त्रिभुज बनाइए जिनमें एक कोण $30^\circ$ हो। ये सारे त्रिभुज आपस में समरूप होंगे, और समरूप त्रिभुजों में संगत भुजाओं का अनुपात बराबर होता है। इसका मतलब — भुजाओं का अनुपात सिर्फ़ कोण पर निर्भर करता है, त्रिभुज के आकार पर नहीं। इन्हीं स्थिर अनुपातों को हम त्रिकोणमितीय अनुपात कहते हैं।
कोण A के लिए छह अनुपात इस तरह बनते हैं:
| अनुपात | परिभाषा | 3-4-5 त्रिभुज में मान |
|---|---|---|
| sin A (ज्या) | सम्मुख ÷ कर्ण | 3/5 |
| cos A (कोज्या) | संलग्न ÷ कर्ण | 4/5 |
| tan A (स्पर्शज्या) | सम्मुख ÷ संलग्न | 3/4 |
| cosec A | कर्ण ÷ सम्मुख | 5/3 |
| sec A | कर्ण ÷ संलग्न | 5/4 |
| cot A | संलग्न ÷ सम्मुख | 4/3 |
ध्यान दीजिए कि नीचे के तीन अनुपात ऊपर के तीन के व्युत्क्रम ही हैं — $\operatorname{cosec} A = \frac{1}{\sin A}, \sec A = \frac{1}{\cos A}, \cot A = \frac{1}{\tan A}$। यानी असल में याद रखने लायक सिर्फ़ तीन ही हैं। और दो रिश्ते और मुफ़्त में मिलते हैं:$\tan A = \sin A \div \cos A$ तथा $\cot A = \cos A \div \sin A$। इन्हें आप ख़ुद जाँच सकते हैं — (सम्मुख/कर्ण) ÷ (संलग्न/कर्ण) में कर्ण कट जाता है और बचता है सम्मुख/संलग्न, जो tan A है।
छोटे नामों में यही बात और जल्दी बैठ जाती है: sin = लंब/कर्ण, cos = आधार/कर्ण, tan = लंब/आधार। तीनों के हर (नीचे वाले भाग) पर नज़र डालिए — दो में कर्ण है, तीसरे में नहीं। बस इतना ही फ़र्क़ याद रखना है।
चरण 1: $\sin A =$ सम्मुख/कर्ण = 3/5, इसलिए सम्मुख भुजा 3k और कर्ण 5k मान लीजिए (k कोई धनात्मक संख्या)।
चरण 2: पाइथागोरस से संलग्न भुजा $= \sqrt{(5k)^2-(3k)^2} = \sqrt{25k^2-9k^2} = \sqrt{16k^2} = 4k$।
चरण 3: अब $\cos A =$ संलग्न/कर्ण $= \frac{4k}{5k} =$ 4/5, और $\tan A =$ सम्मुख/संलग्न $= \frac{3k}{4k} =$ 3/4।
जाँच: $\left(\frac{3}{5}\right)^2 + \left(\frac{4}{5}\right)^2 = \frac{9}{25} + \frac{16}{25} = \frac{25}{25} = 1$ — जो अगली सर्वसमिका बिल्कुल सही ठहराती है।
3. विशेष कोणों के मान
कक्षा 10 के इस अध्याय के मानक प्रश्नों में कोण $0^\circ , 30^\circ , 45^\circ , 60^\circ$ या $90^\circ$ ही होता है। इसीलिए इन पाँच कोणों के अनुपात-मान आपको ऐसे आने चाहिए जैसे पहाड़े आते हैं। ये मान आसमान से नहीं टपके — $45^\circ$ वाले मान एक समद्विबाहु समकोण त्रिभुज से निकलते हैं, और 30°-60° वाले एक समबाहु त्रिभुज को बीच से आधा काटने पर मिलते हैं।
| कोण → | $0^\circ$ | $30^\circ$ | $45^\circ$ | $60^\circ$ | $90^\circ$ |
|---|---|---|---|---|---|
| sin | 0 | 1/2 | $\frac{1}{\sqrt{2}}$ | $\frac{\sqrt{3}}{2}$ | 1 |
| cos | 1 | $\frac{\sqrt{3}}{2}$ | $\frac{1}{\sqrt{2}}$ | 1/2 | 0 |
| tan | 0 | $\frac{1}{\sqrt{3}}$ | 1 | $\sqrt{3}$ | अपरिभाषित |
| cosec | अपरिभाषित | 2 | $\sqrt{2}$ | $\frac{2}{\sqrt{3}}$ | 1 |
| sec | 1 | $\frac{2}{\sqrt{3}}$ | $\sqrt{2}$ | 2 | अपरिभाषित |
| cot | अपरिभाषित | $\sqrt{3}$ | 1 | $\frac{1}{\sqrt{3}}$ | 0 |
चरण 1 — मान रखिए: $sin30^\circ = \frac{1}{2}, cos45^\circ = \frac{1}{\sqrt{2}}, tan30^\circ = \frac{1}{\sqrt{3}}$।
चरण 2 — वर्ग कीजिए: $\sin^230^\circ = \frac{1}{4}, \cos^245^\circ = \frac{1}{2}, \tan^230^\circ = \frac{1}{3}$।
चरण 3 — जोड़-घटाव: $5 \times \left(\frac{1}{4}\right) + \frac{1}{2}-4 \times \left(\frac{1}{3}\right) = \frac{5}{4} + \frac{1}{2}-\frac{4}{3}$।
चरण 4 — समान हर: हर 12 लेने पर = 15/12 + 6/12 − 16/12 = 5/12।
4. त्रिकोणमितीय सर्वसमिकाएँ
सर्वसमिका (identity) वह समीकरण है जो कोण के हर मान्य मान के लिए सही रहती है — किसी ख़ास कोण के लिए नहीं, हमेशा के लिए। कक्षा 10 में तीन सर्वसमिकाएँ चाहिए, और मज़े की बात यह है कि तीनों एक ही जगह से आती हैं: पाइथागोरस प्रमेय।
देखिए कैसे। समकोण त्रिभुज ABC में (समकोण B पर) पाइथागोरस कहती है $AB^2 + BC^2 = AC^2$। अब पूरे समीकरण को $AC^2$ से भाग दे दीजिए:$\left(\frac{AB}{AC}\right)^2 + \left(\frac{BC}{AC}\right)^2 = 1$। पर AB/AC तो cos A है और BC/AC तो sin A — इसलिए सीधे मिल जाता है $\sin^2A + \cos^2A = 1$। अब उसी पाइथागोरस समीकरण को $AB^2$ से भाग दीजिए तो $1 + \tan^2A = \sec^2A$ मिलेगा, और $BC^2$ से भाग दीजिए तो $1 + \cot^2A = \operatorname{cosec}^2A$। तीनों एक ही प्रमेय के तीन चेहरे हैं।
इनके फेरबदल भी उतने ही काम के हैं — जैसे $\sin^2A = 1-\cos^2A, \sec^2A-\tan^2A = 1, \operatorname{cosec}^2A-\cot^2A = 1$।
सर्वसमिका वाले प्रश्न हल करने का एक बहुत भरोसेमंद तरीक़ा है, जिसे आप हर बार दोहरा सकते हैं:
- जो पक्ष ज़्यादा उलझा हुआ दिखे, उसी पर काम शुरू कीजिए और उसे दूसरे पक्ष तक ले जाइए — दोनों तरफ़ एक साथ मत छेड़िए।
- अगर रास्ता न सूझे तो सब कुछ sin और cos में बदल दीजिए। यह लगभग हमेशा काम करता है।
- जहाँ 1 दिखे, सोचिए कि उसे $\sin^2A + \cos^2A$ लिखने से बात बनेगी क्या।
- (1 − cos A) जैसी चीज़ दिखे तो (1 + cos A) से गुणा-भाग कीजिए — व्यंजक अक्सर जल्दी सरल हो जाता है।
चरण 1: अंश में सर्वसमिका लगाइए — $1 + \tan^2A = \sec^2A$।
चरण 2: हर में — $1 + \cot^2A = \operatorname{cosec}^2A$।
चरण 3: अब व्यंजक बना $\sec^2A \div \operatorname{cosec}^2A = \left(\frac{1}{\cos^2A}\right) \div \left(\frac{1}{\sin^2A}\right) = \frac{\sin^2A}{\cos^2A}$।
चरण 4: और sin A/cos A तो tan A है, इसलिए यह $\tan^2A$ के बराबर है। सिद्ध हुआ।
चरण 1: $\sec A =$ कर्ण/संलग्न = 13/12, इसलिए कर्ण 13k और संलग्न भुजा 12k।
चरण 2: सम्मुख भुजा $= \sqrt{(13k)^2-(12k)^2} = \sqrt{169k^2-144k^2} = \sqrt{25k^2} = 5k$।
चरण 3: $\sin A = \frac{5k}{13k} =$ 5/13,$\tan A = \frac{5k}{12k} =$ 5/12।
जाँच: $\sec^2A-\tan^2A = \frac{169}{144}-\frac{25}{144} = \frac{144}{144} = 1$ — सर्वसमिका पूरी हुई, इसलिए उत्तर सही है।
अगर यह अध्याय आपको पसंद आ रहा है तो बहुपद और द्विघात समीकरण के नोट्स भी इसी तरीक़े से लिखे गए हैं — वहाँ भी हर सूत्र बनाकर समझाया गया है।
अभ्यास प्रश्नावली
हर प्रश्न पहले कॉपी पर पूरा हल कीजिए, उसके बाद ही उत्तर देखें पर टैप कीजिए। सिर्फ़ उत्तर मिला लेना पढ़ाई नहीं है।
प्र1. यदि $\tan A = \frac{4}{3}$ हो, तो sin A और cos A ज्ञात कीजिए।
उत्तर देखें
प्र2. $\sin 30^\circ \cdot \cos 60^\circ + \cos 30^\circ \cdot \sin 60^\circ$ का मान ज्ञात कीजिए।
उत्तर देखें
प्र3. $2 \tan^245^\circ + \cos^230^\circ-\sin^260^\circ$ का मान ज्ञात कीजिए।
उत्तर देखें
प्र4. यदि $0^\circ$ < A < $90^\circ$ में $\sin A = \cos A$ हो, तो A का मान बताइए।
उत्तर देखें
प्र5. यदि $\cot \theta = \frac{7}{8}$ हो, तो $(1 + \sin \theta )(1-\sin \theta ) \div (1 + \cos \theta )(1-\cos \theta )$ का मान ज्ञात कीजिए।
उत्तर देखें
प्र6. सिद्ध कीजिए कि $(\operatorname{cosec} A-\cot A)^2 = (1-\cos A) \div (1 + \cos A)$।
उत्तर देखें
प्र7. यदि $\tan(A + B) = \sqrt{3}$ और $\tan\left(A-B\right) = \frac{1}{\sqrt{3}}$ हो, जहाँ A और B न्यून कोण हैं, तो A और B ज्ञात कीजिए।
उत्तर देखें
1. $\sin^260^\circ + \cos^260^\circ$ का मान क्या है?
2. $\tan 30^\circ \times \tan 60^\circ$ का मान क्या है?
3. यदि $3 \tan A = 4$ हो, तो sin A क्या होगा?
4. $2 \sin 45^\circ \cdot \cos 45^\circ$ का मान क्या है?
5. $9 \sec^2A-9 \tan^2A$ का मान क्या है?
बस इतना ही। अगर ये पाँच प्रश्न बिना अटके निकल गए, तो त्रिकोणमिति की नींव आपकी पकड़ में है। पहली बार में सब कुछ सही होने की उम्मीद मत रखिए — कल से बस एक प्रश्न ज़्यादा सही करने का लक्ष्य रखिए। अगला क़दम है इसी ज्ञान को ऊँचाई और दूरी वाले असली सवालों पर लगाना, और उससे पहले वास्तविक संख्याएँ तथा दो चरों वाले रैखिक समीकरण युग्म पर एक बार नज़र डाल लेना भी अच्छा रहेगा।
रोज़ थोड़ा-थोड़ा, पर रोज़ — यही काइज़ेन है। एक दिन में पूरा अध्याय नहीं, हर दिन एक भाग।

