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दो चरों वाले रैखिक समीकरण युग्म — कक्षा 10 गणित (पूरा अध्याय, आसान भाषा में)

दो चरों वाले रैखिक समीकरण युग्म — कक्षा 10 गणित (पूरा अध्याय, आसान भाषा में)
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पिछले अध्याय तक आप एक ही चर वाले समीकरण हल करते आए हैं। अब कहानी में एक चर और जुड़ जाता है — और यहीं बहुत से विद्यार्थी घबरा जाते हैं। घबराने की ज़रूरत नहीं है। दो चरों वाले रैखिक समीकरण युग्म (Pair of Linear Equations in Two Variables) असल में एक बहुत सीधा विचार है: दो शर्तें एक साथ दी गई हैं, और हमें वह जोड़ी ढूँढ़नी है जो दोनों शर्तों को एक साथ पूरा करे। इस अध्याय में हम पहले यह समझेंगे कि ऐसा युग्म दिखता कैसा है, फिर ग्राफ़ पर उसका अर्थ देखेंगे, और उसके बाद दो भरोसेमंद बीजगणितीय विधियाँ सीखेंगे। हर विधि को छोटे-छोटे क़दमों में, हल किए हुए उदाहरणों के साथ बनाएँगे — जैसे कोई शिक्षक आपकी कॉपी के पास बैठकर समझा रहा हो।

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घर के दो सदस्यों की उम्र का योग और अंतर मालूम करें, फिर इनसे दो चरों वाले रैखिक समीकरणों का एक युग्म बनाएं और हल करके उनकी वास्तविक उम्र ज्ञात करें। (20 मिनट)

आपकी तैयारी की योजना

  1. पहले युग्म का अर्थ पकड़िए — हल का मतलब एक जोड़ी होती है, अकेली संख्या नहीं।
  2. ग्राफ़ पर तीनों स्थितियाँ देख लीजिए; इससे बाक़ी सब सहज हो जाएगा।
  3. अनुपात की जाँच सीखिए — बोर्ड में इसका सीधा 1 अंक का प्रश्न आता है।
  4. प्रतिस्थापन और विलोपन — दोनों विधियाँ अलग-अलग साधिए।
  5. शब्द समस्याओं में अनुवाद का अभ्यास कीजिए; असली अंक यहीं हैं।
  6. अंत की प्रश्नावली और प्रश्नोत्तरी से पकड़ पक्की कीजिए।
इस अध्याय का दायरा
यहाँ हल की तीन विधियाँ समझाई गई हैं — ग्राफ़ीय, प्रतिस्थापन और विलोपन। कुछ राज्य बोर्डों के पाठ्यक्रम में वज्र-गुणन विधि (Cross-Multiplication) भी शामिल रहती है, इसलिए तैयारी शुरू करने से पहले अपने बोर्ड का चालू पाठ्यक्रम एक बार ज़रूर देख लीजिए।

1. रैखिक समीकरण युग्म आख़िर है क्या

मान लीजिए दुकानदार कहता है — “दो कॉपी और तीन पेन के कुल ₹80 हुए।” यह एक शर्त है, पर इससे अकेले कॉपी या पेन का दाम तय नहीं होता। कई जोड़ियाँ इस शर्त पर खरी उतरेंगी। लेकिन अगर वह एक और बात बता दे — “तीन कॉपी और दो पेन के ₹95 हुए” — तो अब दोनों शर्तें मिलकर दाम को एक ही जगह बाँध देती हैं। यही रैखिक समीकरण युग्म का पूरा विचार है: दो शर्तें, दो अनजान संख्याएँ, और वह एक जोड़ी जो दोनों को एक साथ संतुष्ट करती है।

गणित की भाषा में हम ऐसे युग्म को इस मानक रूप में लिखते हैं — a₁x + b₁y + c₁ = 0 और a₂x + b₂y + c₂ = 0, जहाँ a₁, b₁ दोनों एक साथ शून्य नहीं हैं (और इसी तरह a₂, b₂ भी)। “रैखिक” शब्द इसलिए आया क्योंकि x और y दोनों की घात केवल 1 है — न कोई वर्ग, न कोई गुणनफल xy। यही कारण है कि इनका ग्राफ़ हमेशा एक सीधी रेखा बनता है, कभी मुड़ता नहीं।

मुख्य विचार
दो चरों वाले समीकरण का हल एक जोड़ी (x, y) होती है, अकेली संख्या नहीं। और युग्म का हल वह जोड़ी है जो दोनों समीकरणों को एक साथ सही बनाती है — किसी एक को नहीं।

ऊपर वाली दुकान की बात को अब समीकरण में बदलिए। कॉपी का दाम x और पेन का दाम y मान लीजिए। पहली शर्त बनी 2x + 3y = 80 और दूसरी बनी 3x + 2y = 95। ध्यान दीजिए, चर चुनते समय हमने साफ़ लिखा कि x किसका दाम है — यह आदत आगे शब्द समस्याओं में बहुत काम आएगी। जाँच के तौर पर देख लीजिए कि x = 25 और y = 10 दोनों शर्तों पर खरे उतरते हैं: 2(25) + 3(10) = 50 + 30 = 80, और 3(25) + 2(10) = 75 + 20 = 95। यही इस युग्म का हल है।

छोटी-सी आदत, बड़ा फ़ायदा
उत्तर निकालने के बाद उसे दोनों मूल समीकरणों में रखकर जाँचिए। इसमें बीस सेकंड लगते हैं और यह लापरवाही की भूल तुरंत पकड़ लेता है। बोर्ड की कॉपी में यह जाँच लिख देने पर प्रस्तुति भी अच्छी लगती है।

2. ग्राफ़ की भाषा — सिर्फ़ तीन ही संभावनाएँ

हर रैखिक समीकरण एक सीधी रेखा है। तो युग्म का मतलब हुआ — कागज़ पर खींची गई दो सीधी रेखाएँ। अब ज़रा सोचिए: एक समतल पर दो सीधी रेखाएँ आपस में कितनी तरह से पेश आ सकती हैं? बस तीन तरह से। या तो वे किसी एक बिंदु पर काटती हैं, या वे कभी नहीं मिलतीं (समांतर रहती हैं), या फिर वे एक-दूसरे पर पूरी तरह चढ़ी होती हैं। इससे चौथी कोई स्थिति संभव ही नहीं है — और यही बात इस पूरे अध्याय को इतना सुलझा हुआ बना देती है।

इन तीन ज्यामितीय स्थितियों का बीजगणितीय अर्थ इस तरह निकलता है। प्रतिच्छेदी रेखाएँ एक ही बिंदु साझा करती हैं, इसलिए युग्म का ठीक एक हल होता है और युग्म संगत (consistent) कहलाता है। समांतर रेखाओं में कोई साझा बिंदु नहीं होता, इसलिए कोई हल नहीं होता और युग्म असंगत (inconsistent) कहलाता है। संपाती रेखाएँ (एक ही रेखा दो बार लिखी हुई) हर बिंदु साझा करती हैं, इसलिए अनगिनत हल होते हैं; ऐसा युग्म संगत तो है, पर आश्रित (dependent) कहलाता है।

उदाहरण 1 — ग्राफ़ से हल पढ़िए: x + y = 10 और x − y = 4
पहली रेखा के लिए दो सुविधाजनक बिंदु लीजिए: x = 0 रखने पर y = 10, और y = 0 रखने पर x = 10। तो बिंदु (0, 10) और (10, 0) मिले। दूसरी रेखा के लिए: x = 0 रखने पर y = −4, और y = 0 रखने पर x = 4 — यानी (0, −4) और (4, 0)। दोनों रेखाएँ खींचने पर वे (7, 3) पर कटती हैं। जाँचिए: 7 + 3 = 10 ✓ और 7 − 3 = 4 ✓। चूँकि वे एक ही बिंदु पर कटीं, युग्म संगत है और हल अद्वितीय है।
ग्राफ़ बनाते समय
हर रेखा के लिए कम से कम तीन बिंदु लीजिए — दो से रेखा बन जाती है, पर तीसरा बिंदु आपकी गणना की जाँच कर देता है। यदि तीनों एक सीध में न आएँ, तो कहीं अंकगणित की भूल है। सबसे आसान बिंदु वही हैं जहाँ x = 0 या y = 0 हो। और हाँ — दोनों अक्षों पर पैमाना (Scale) लिखना मत भूलिए, जैसे “1 सेमी = 1 इकाई”। बोर्ड परीक्षा में ग्राफ़ वाले प्रश्न में इसके लिए अलग से अंक निर्धारित होता है।
सामान्य ग़लती
“कोई हल नहीं” और “हल शून्य है” एक बात नहीं हैं। समांतर रेखाओं वाले युग्म का कोई हल नहीं होता — जबकि (0, 0) अपने आप में एक बिल्कुल वैध हल हो सकता है, अगर वह दोनों समीकरणों को संतुष्ट करता हो। उत्तर लिखते समय शब्द सोच-समझकर चुनिए।

3. बिना हल किए उत्तर की प्रकृति पहचानिए

कई बार प्रश्न हल माँगता ही नहीं — वह सिर्फ़ यह पूछता है कि युग्म के कितने हल होंगे। ऐसे में पूरा हल निकालना समय की बर्बादी है। दोनों समीकरणों को मानक रूप a₁x + b₁y + c₁ = 0 में लिखिए और सिर्फ़ तीन अनुपातों की तुलना कीजिए: a₁/a₂, b₁/b₂ और c₁/c₂। इन तीन भिन्नों को देखकर ही उत्तर बता दिया जा सकता है।

तीन अनुपातों का नियम
a₁/a₂ ≠ b₁/b₂ → प्रतिच्छेदी रेखाएँ, अद्वितीय हल (संगत)
a₁/a₂ = b₁/b₂ = c₁/c₂ → संपाती रेखाएँ, अनगिनत हल (संगत, आश्रित)
a₁/a₂ = b₁/b₂ ≠ c₁/c₂ → समांतर रेखाएँ, कोई हल नहीं (असंगत)

इसे रटने की बजाय समझ लीजिए तो कभी नहीं भूलेंगे। a और b के अनुपात रेखा के ढलान से जुड़े हैं। अगर ढलान अलग हैं, रेखाएँ कहीं न कहीं कटेंगी ही — एक हल। अगर ढलान बराबर हैं, रेखाएँ एक ही दिशा में जा रही हैं; अब सवाल बस इतना है कि वे एक ही रेखा हैं या अलग-अलग। यह फ़ैसला c का अनुपात करता है — अगर वह भी मेल खा गया, तो दोनों दरअसल एक ही रेखा हैं (अनगिनत हल); अगर नहीं खाया, तो वे साथ-साथ चलती दो अलग रेखाएँ हैं जो कभी नहीं मिलतीं (कोई हल नहीं)।

मानक रूप में लाना मत भूलिए
अनुपात लगाने से पहले दोनों समीकरणों को = 0 वाले रूप में लाइए, वरना c₁/c₂ का चिह्न ग़लत निकल आएगा। 2x − 3y = 8 को पहले 2x − 3y − 8 = 0 लिखिए, तभी c₁ = −8 मिलेगा। सीधे 8 और 9 की तुलना कर बैठना इस अध्याय की सबसे आम भूल है।
उदाहरण 2 — 2x − 3y = 8 और 4x − 6y = 9
मानक रूप: 2x − 3y − 8 = 0 और 4x − 6y − 9 = 0। अब a₁/a₂ = 2/4 = 1/2, b₁/b₂ = (−3)/(−6) = 1/2, और c₁/c₂ = (−8)/(−9) = 8/9। यहाँ पहले दो अनुपात बराबर हैं पर तीसरा उनसे अलग है। इसलिए रेखाएँ समांतर हैं और युग्म का कोई हल नहीं — यह असंगत युग्म है।
उदाहरण 3 — 3x + 2y = 12 और 6x + 4y = 24
मानक रूप में c₁ = −12 और c₂ = −24। अनुपात: 3/6 = 1/2, 2/4 = 1/2, और (−12)/(−24) = 1/2। तीनों बराबर हैं, इसलिए दूसरा समीकरण दरअसल पहले को 2 से गुणा करने पर बना है — यानी दोनों एक ही रेखा हैं। युग्म के अनगिनत हल हैं।
उदाहरण 4 — k का वह मान जिसके लिए कोई हल न हो
प्रश्न: kx + 3y = k − 3 और 12x + ky = k का कोई हल न होने के लिए k का मान ज्ञात कीजिए।
पहले a और b के अनुपात बराबर कीजिए: k/12 = 3/k, यानी k² = 36, जिससे k = 6 या k = −6 मिलता है। यहीं रुक जाना सबसे बड़ी भूल होगी — अभी c का अनुपात जाँचना बाक़ी है।
मानक रूप में c₁ = −(k − 3) और c₂ = −k, तो c₁/c₂ = (k − 3)/k।
k = 6 पर: a₁/a₂ = 6/12 = 1/2 और c₁/c₂ = 3/6 = 1/2 — तीनों अनुपात बराबर! यानी k = 6 पर तो अनगिनत हल मिलते हैं, कोई हल न होने की स्थिति नहीं।
k = −6 पर: a₁/a₂ = (−6)/12 = −1/2 और c₁/c₂ = (−6 − 3)/(−6) = (−9)/(−6) = 3/2 — ये अलग हैं। शर्त पूरी हुई।
इसलिए उत्तर है केवल k = −6
यही वह जगह है जहाँ अंक कटते हैं
k वाले प्रश्नों में a और b के अनुपात से जो मान निकलते हैं, वे सिर्फ़ उम्मीदवार होते हैं — अंतिम उत्तर नहीं। हर उम्मीदवार को c के अनुपात में रखकर जाँचिए। ऊपर के उदाहरण में दोनों मान पहली शर्त पर खरे उतरे, पर सही उत्तर केवल एक निकला। दोनों लिख देने पर पूरे अंक नहीं मिलेंगे।

4. प्रतिस्थापन विधि (Substitution)

ग्राफ़ सुंदर है, पर जब हल भिन्न में आए तो ग्राफ़ से उसे ठीक-ठीक पढ़ना मुश्किल हो जाता है। इसलिए हमें बीजगणितीय विधियाँ चाहिए। पहली विधि का विचार बहुत सीधा है: दो चरों की समस्या को एक चर की समस्या में बदल दीजिए, क्योंकि एक चर वाला समीकरण हल करना आप पहले से जानते हैं।

प्रतिस्थापन के चार क़दम
क़दम 1: दोनों में से जो समीकरण सबसे आसान लगे, उसमें से एक चर को अलग कीजिए (जिस चर का गुणांक 1 या −1 हो, वही चुनिए)।
क़दम 2: यह व्यंजक दूसरे समीकरण में रखिए — अपने ही समीकरण में नहीं।
क़दम 3: अब एक चर वाला समीकरण बचा है; उसे हल कर लीजिए।
क़दम 4: मिला हुआ मान क़दम 1 वाले व्यंजक में रखकर दूसरा चर निकालिए, और उत्तर की जाँच कीजिए।
उदाहरण 5 — 3x + 2y = 19 और x − y = 3
दूसरा समीकरण आसान है क्योंकि x का गुणांक 1 है। उसमें से x अलग कीजिए: x = y + 3
अब इसे पहले समीकरण में रखिए: 3(y + 3) + 2y = 19 → 3y + 9 + 2y = 19 → 5y + 9 = 19 → 5y = 10 → y = 2
अब x = y + 3 में रखिए: x = 2 + 3 = 5
जाँच: 3(5) + 2(2) = 15 + 4 = 19 ✓ और 5 − 2 = 3 ✓। हल है x = 5, y = 2
कौन-सा चर अलग करें
हमेशा उस चर को चुनिए जिसका गुणांक 1 या −1 हो — तब भिन्न बनती ही नहीं और गणना साफ़ रहती है। अगर किसी भी चर का गुणांक 1 नहीं है, तो प्रतिस्थापन की बजाय अगली विधि (विलोपन) आम तौर पर तेज़ पड़ती है।
एक ही समीकरण में वापस मत रखिए
अगर आपने पहले समीकरण से x अलग किया और फिर उसी पहले समीकरण में वापस रख दिया, तो हाथ लगेगा 0 = 0 जैसी कोई निरर्थक बात। व्यंजक हमेशा दूसरे समीकरण में जाना चाहिए — तभी नई जानकारी मिलती है।

5. विलोपन विधि (Elimination)

जब किसी भी चर का गुणांक 1 नहीं होता, प्रतिस्थापन में भिन्नें आने लगती हैं। ऐसे में विलोपन विधि कहीं ज़्यादा सुविधाजनक है। इसका विचार यह है: दोनों समीकरणों को ऐसी उपयुक्त संख्याओं से गुणा कीजिए कि किसी एक चर के गुणांक बराबर परिमाण के हो जाएँ। फिर दोनों समीकरणों को जोड़ या घटा देने पर वह चर पूरी तरह ग़ायब हो जाता है — और बचता है एक चर वाला सीधा समीकरण।

जोड़ें या घटाएँ — कैसे तय करें
गुणांक बराबर करने के बाद देखिए कि उनके चिह्न कैसे हैं। चिह्न विपरीत हों (जैसे +6y और −6y) तो दोनों समीकरण जोड़ दीजिए। चिह्न समान हों (जैसे +6y और +6y) तो एक को दूसरे में से घटा दीजिए। इतना-सा फ़ैसला ठीक ले लिया तो आधी भूलें अपने आप बच जाती हैं।
उदाहरण 6 — 4x + 3y = 25 और 3x − 2y = 6
y को हटाना सुविधाजनक है। 3 और 2 का ल.स. 6 है, तो पहले समीकरण को 2 से और दूसरे को 3 से गुणा कीजिए:
पहला × 2 → 8x + 6y = 50
दूसरा × 3 → 9x − 6y = 18
y के गुणांक +6 और −6 हैं — चिह्न विपरीत, इसलिए दोनों को जोड़ दीजिए: 17x = 68, जिससे x = 4
अब x = 4 को मूल पहले समीकरण में रखिए: 4(4) + 3y = 25 → 16 + 3y = 25 → 3y = 9 → y = 3
जाँच: 3(4) − 2(3) = 12 − 6 = 6 ✓। हल है x = 4, y = 3
उदाहरण 7 — 7x − 2y = 1 और 3x + 4y = 15
इस बार भी y हटाइए। पहले समीकरण को 2 से गुणा कीजिए: 14x − 4y = 2। दूसरा वैसा ही है: 3x + 4y = 15। गुणांक −4 और +4 — विपरीत चिह्न, तो जोड़ दीजिए: 17x = 17, यानी x = 1
अब 3(1) + 4y = 15 → 4y = 12 → y = 3
जाँच: 7(1) − 2(3) = 7 − 6 = 1 ✓। हल है x = 1, y = 3
विलोपन के बाद क्या होता है, उसका भी अर्थ है
यदि विलोपन के बाद 0 = 0 जैसा सच्चा कथन बचे, तो युग्म के अनगिनत हल हैं (संपाती रेखाएँ)। यदि 0 = 5 जैसा असंभव कथन बचे, तो कोई हल नहीं है (समांतर रेखाएँ)। यानी विलोपन विधि ख़ुद ही आपको बता देती है कि युग्म किस श्रेणी का था।

6. शब्द समस्याएँ — कहानी से समीकरण तक

बोर्ड में इस अध्याय के सबसे ज़्यादा अंक शब्द समस्याओं पर ही होते हैं, और यहीं सबसे ज़्यादा विद्यार्थी अटकते हैं। अटकने की वजह गणित नहीं होती — वजह होती है अनुवाद। एक बार कहानी सही-सही दो समीकरणों में उतर गई, तो आगे का काम वही प्रतिस्थापन या विलोपन है जो आप ऊपर सीख चुके हैं।

अनुवाद की तीन-क़दम आदत
क़दम 1: चर तय कीजिए और उन्हें शब्दों में लिखिए — “माना पुत्र की आयु y वर्ष है”, न कि सिर्फ़ “माना y”।
क़दम 2: कहानी में जितने स्वतंत्र तथ्य दिए हैं, उतने समीकरण बनाइए — दो चरों के लिए ठीक दो चाहिए।
क़दम 3: हल निकालकर उसे कहानी की भाषा में लौटाइए और तर्क से जाँचिए कि उत्तर संभव है या नहीं।
उदाहरण 8 — आयु वाली समस्या
प्रश्न: पिता की आयु पुत्र की आयु की चार गुनी है। 10 वर्ष बाद पिता की आयु पुत्र की आयु की ढाई गुनी हो जाएगी। दोनों की वर्तमान आयु ज्ञात कीजिए।
माना पुत्र की वर्तमान आयु y वर्ष और पिता की x वर्ष है।
पहला तथ्य: x = 4y
दूसरा तथ्य (10 वर्ष बाद दोनों की आयु 10-10 बढ़ेगी): x + 10 = 2.5(y + 10)
पहला वाला दूसरे में रखिए: 4y + 10 = 2.5y + 25 → 1.5y = 15 → y = 10, और x = 4(10) = 40
जाँच: आज पिता 40 और पुत्र 10 — चार गुनी ✓। 10 वर्ष बाद 50 और 20, और 2.5 × 20 = 50 ✓। उत्तर: पिता 40 वर्ष, पुत्र 10 वर्ष।
उदाहरण 9 — भिन्न वाली समस्या
प्रश्न: एक भिन्न के अंश और हर का योग 12 है। यदि हर में 3 जोड़ दिया जाए तो भिन्न 1/2 हो जाती है। वह भिन्न ज्ञात कीजिए।
माना अंश x और हर y है।
पहला तथ्य: x + y = 12
दूसरा तथ्य: x/(y + 3) = 1/2, जिसे तिर्यक गुणा करके सीधा कीजिए → 2x = y + 3, यानी 2x − y = 3।
दोनों को जोड़ दीजिए (y के चिह्न विपरीत हैं): 3x = 15 → x = 5, और फिर y = 12 − 5 = 7
जाँच: 5 + 7 = 12 ✓ और 5/(7 + 3) = 5/10 = 1/2 ✓। भिन्न है 5/7
उदाहरण 10 — ख़रीदारी वाली समस्या
प्रश्न: 2 कुर्सियों और 3 मेज़ों का कुल मूल्य ₹4200 है, जबकि 3 कुर्सियों और 2 मेज़ों का कुल मूल्य ₹3800 है। एक कुर्सी और एक मेज़ का मूल्य ज्ञात कीजिए।
माना एक कुर्सी ₹c और एक मेज़ ₹t की है। तब 2c + 3t = 4200 और 3c + 2t = 3800
c हटाने के लिए पहले को 3 से और दूसरे को 2 से गुणा कीजिए: 6c + 9t = 12600 और 6c + 4t = 7600। गुणांक समान चिह्न के हैं, इसलिए घटाइए: 5t = 5000 → t = 1000
अब 2c + 3(1000) = 4200 → 2c = 1200 → c = 600
जाँच: 3(600) + 2(1000) = 1800 + 2000 = 3800 ✓। कुर्सी ₹600 और मेज़ ₹1000 की है।
इकाई और तर्क की जाँच कीजिए
शब्द समस्या का उत्तर सिर्फ़ संख्या नहीं होता — उसके साथ इकाई भी आती है (वर्ष, रुपये, किलोमीटर)। और उत्तर तर्कसंगत भी होना चाहिए: आयु ऋणात्मक नहीं हो सकती, वस्तुओं की संख्या भिन्न में नहीं आ सकती। ऐसा उत्तर आए तो समीकरण बनाने में ही कहीं भूल हुई है।

अभ्यास प्रश्नावली

हर प्रश्न पहले कॉपी पर पूरा हल कीजिए, उसके बाद ही उत्तर देखें पर टैप कीजिए। जहाँ विधि बताई गई है, वहीं विधि अपनाइए — अभ्यास का मक़सद दोनों विधियों पर पकड़ बनाना है।

प्र1. प्रतिस्थापन विधि से हल कीजिए: 2x + y = 8 और x − y = 1।

उत्तर देखें
दूसरे से x = y + 1। पहले में रखिए: 2(y + 1) + y = 8 → 3y + 2 = 8 → 3y = 6 → y = 2। तब x = 3। जाँच: 2(3) + 2 = 8 ✓, 3 − 2 = 1 ✓। हल: x = 3, y = 2

प्र2. विलोपन विधि से हल कीजिए: 3x + 4y = 10 और 2x − 2y = 2।

उत्तर देखें
दूसरे को 2 से गुणा कीजिए: 4x − 4y = 4। y के चिह्न विपरीत हैं, तो जोड़िए: 7x = 14 → x = 2। फिर 2(2) − 2y = 2 → 2y = 2 → y = 1। जाँच: 3(2) + 4(1) = 10 ✓। हल: x = 2, y = 1

प्र3. विलोपन विधि से हल कीजिए: 7x − 2y = 1 और 3x + 4y = 15।

उत्तर देखें
पहले को 2 से गुणा कीजिए: 14x − 4y = 2। जोड़िए: 17x = 17 → x = 1। फिर 3(1) + 4y = 15 → 4y = 12 → y = 3। जाँच: 7(1) − 2(3) = 1 ✓। हल: x = 1, y = 3

प्र4. हल कीजिए: 5x + 3y = 35 और 2x − y = 3।

उत्तर देखें
दूसरे से y = 2x − 3। पहले में रखिए: 5x + 3(2x − 3) = 35 → 11x − 9 = 35 → 11x = 44 → x = 4। तब y = 8 − 3 = 5। जाँच: 5(4) + 3(5) = 20 + 15 = 35 ✓। हल: x = 4, y = 5

प्र5. बिना हल किए बताइए कि युग्म 6x − 3y + 10 = 0 और 2x − y + 9 = 0 के कितने हल हैं।

उत्तर देखें
a₁/a₂ = 6/2 = 3, b₁/b₂ = (−3)/(−1) = 3, c₁/c₂ = 10/9। पहले दो बराबर हैं पर तीसरा अलग है, इसलिए रेखाएँ समांतर हैं — कोई हल नहीं (असंगत युग्म)।

प्र6. युग्म 2x + 3y = 7 और 4x + 6y = 14 की प्रकृति बताइए।

उत्तर देखें
मानक रूप में अनुपात: 2/4 = 1/2, 3/6 = 1/2, (−7)/(−14) = 1/2 — तीनों बराबर। रेखाएँ संपाती हैं, इसलिए अनगिनत हल हैं (संगत, आश्रित युग्म)।

प्र7. k के किस मान के लिए युग्म 2x + 3y = 7 और (k − 1)x + (k + 2)y = 3k के अनगिनत हल होंगे?

उत्तर देखें
तीनों अनुपात बराबर चाहिए: 2/(k − 1) = 3/(k + 2) = 7/(3k)। पहले दो से: 2(k + 2) = 3(k − 1) → 2k + 4 = 3k − 3 → k = 7। अब तीसरे से जाँचिए: 2/6 = 1/3, 3/9 = 1/3, 7/21 = 1/3 — तीनों बराबर ✓। उत्तर: k = 7

प्र8. दो संख्याओं का अंतर 14 और योग 46 है। संख्याएँ ज्ञात कीजिए।

उत्तर देखें
माना संख्याएँ x और y हैं, x > y। तब x − y = 14 और x + y = 46। जोड़िए: 2x = 60 → x = 30, फिर y = 16। जाँच: 30 − 16 = 14 ✓, 30 + 16 = 46 ✓। संख्याएँ 30 और 16 हैं।

प्र9. एक आयत का परिमाप 44 सेमी है और उसकी लंबाई चौड़ाई से 6 सेमी अधिक है। उसका क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।

उत्तर देखें
माना लंबाई l और चौड़ाई b सेमी है। परिमाप से 2(l + b) = 44 → l + b = 22, और दिया है l − b = 6। जोड़िए: 2l = 28 → l = 14, तब b = 8। क्षेत्रफल = 14 × 8 = 112 वर्ग सेमी

प्र10. 3 पेन और 2 कॉपियों का मूल्य ₹130 है, तथा 5 पेन और 4 कॉपियों का ₹230। एक पेन और एक कॉपी का मूल्य ज्ञात कीजिए।

उत्तर देखें
माना पेन ₹p और कॉपी ₹n की है। 3p + 2n = 130 और 5p + 4n = 230। पहले को 2 से गुणा कीजिए: 6p + 4n = 260। घटाइए: p = 30। फिर 3(30) + 2n = 130 → 2n = 40 → n = 20। जाँच: 5(30) + 4(20) = 150 + 80 = 230 ✓। पेन ₹30, कॉपी ₹20
⚡ त्वरित प्रश्नोत्तरी — खुद को परखिए
किसी विकल्प पर टैप करते ही उत्तर तुरंत पता चलेगा। छह प्रश्न — नोट्स देखे बिना!

1. x + y = 5 और x − y = 1 का हल क्या है?

दोनों समीकरण जोड़िए: 2x = 6 → x = 3। फिर 3 + y = 5 → y = 2। हल (3, 2)।

2. युग्म 2x + 3y = 7 और 4x + 6y = 5 के कितने हल हैं?

2/4 = 3/6 = 1/2, पर c का अनुपात (−7)/(−5) = 7/5 इनसे अलग है। रेखाएँ समांतर हैं — कोई हल नहीं।

3. जोड़ी (2, 3) निम्न में से किस समीकरण को संतुष्ट करती है?

x = 2 और y = 3 रखने पर 2(2) + 3(3) = 4 + 9 = 13। इसलिए 2x + 3y = 13 सही है।

4. 3x − y = 3 और 9x − 3y = 9 की रेखाएँ आपस में कैसी हैं?

तीनों अनुपात 1/3 के बराबर हैं, इसलिए दूसरा समीकरण पहले का ही तीन गुना है — दोनों एक ही रेखा हैं, यानी संपाती।

5. विलोपन से 2x + 5y = 20 और 3x − 5y = 5 हल कीजिए। x का मान क्या है?

y के गुणांक +5 और −5 हैं, तो जोड़ दीजिए: 5x = 25 → x = 5 (और y = 2)।

6. दो संख्याओं का योग 40 है और एक संख्या दूसरी के तिगुने से 4 अधिक है। बड़ी संख्या कौन-सी है?

x + y = 40 और x = 3y + 4। रखिए: 3y + 4 + y = 40 → 4y = 36 → y = 9, तो x = 31।

अगर प्रश्नोत्तरी में चार से कम सही हुए, तो घबराइए मत — ऊपर के अनुपात वाले भाग और विलोपन विधि को एक बार और पढ़िए, फिर प्रश्नावली दोबारा हल कीजिए। यह अध्याय अभ्यास से ही पक्का होता है, पढ़ने भर से नहीं।

रैखिक समीकरण युग्म पर पकड़ बन गई हो तो अगला क़दम वास्तविक संख्याएँ और बहुपद को दोहराना है — तीनों अध्याय मिलकर बीजगणित की नींव बनाते हैं। पूरे विषय के अध्याय हिंदी माध्यम अनुभाग में मिलेंगे।

Written & reviewed by Team Principal Saab — Meet the team →